Bengaluru SIR Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और अन्य संगठनों का विरोध तेज हो गया है। एक तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं, दूसरी तरफ बेंगलुरु में इसी मुद्दे पर विरोध कर रहे कम से कम 100 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने के बाद मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी और अनावश्यक बल प्रयोग होने पर जवाबदेही तय करने की बात कही।
सोमवार को वामपंथी छात्र और युवा संगठनों के साथ एक्टिविस्ट समूह 'माई वोट, माई राइट' ने कर्नाटक में SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बेंगलुरु में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक मार्च निकालना चाहते थे। उनकी मांग थी कि SIR प्रक्रिया रद्द की जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारी ज्ञापन सौंपने के लिए केआर सर्कल के पास एकत्र हुए थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें कार्यालय की ओर बढ़ने से पहले ही हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में छात्र, वकील, कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार आकार पटेल भी शामिल थे।
बेंगलुरु सिटी पुलिस के सेंट्रल डिवीजन के डीसीपी अक्षय एम. हाके ने कहा कि प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के एकत्र हुए थे। पुलिस ने उन्हें फ्रीडम पार्क में जाकर प्रदर्शन करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने निर्देश का पालन नहीं किया। इसके बाद एहतियातन उन्हें हिरासत में लिया गया और फिर रिहा कर दिया गया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी करने के आरोप लगाए। दावा किया गया कि छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, जबकि प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
बेंगलुरु में पुलिस कार्रवाई की आलोचना के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पुलिस ने अनावश्यक बल का इस्तेमाल किया या किसी तरह की ज्यादती की, तो इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी। शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का बुनियादी हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में जिस अधिकार की मांग की जा रही है, उसी अधिकार से बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों को वंचित नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक अधिकारों के मामले में दोहरा रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में बाधा नहीं आनी चाहिए। इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब बेंगलुरु में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस नेता दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में SIR विरोधी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने से राजनीतिक बहस तेज हो गई। अब मुख्यमंत्री की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें नियमों का उल्लंघन किया गया था।
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