Cannabis Shortage in India: दिल्ली-NCR सहित देश के कई बड़े शहरों में पिछले दो महीनों से प्रीमियम गांजे की भारी किल्लत सामने आई है। OG Kush और हाइड्रोपोनिक गांजे जैसी महंगी किस्मों की सप्लाई प्रभावित हुई है। मुंबई और बेंगलुरु में भी ऐसी स्थिति बताई जा रही है, जबकि कोलकाता में कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ने का दावा है।
इंडिया टुडे डिजिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती पुलिस जांच और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई से तस्करों और खरीदारों की मुश्किलें बढ़ी हैं। हालांकि, सस्ता स्थानीय गांजा अब भी उपलब्ध है, जिसमें कई बार दूसरे नशीले पदार्थों की मिलावट होने की आशंका रहती है।
क्या है OG Kush और हाइड्रोपोनिक गांजा?
हाइड्रोपोनिक गांजा मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों वाले पानी में उगाया जाता है। इसकी खेती में रोशनी, तापमान और पानी की आपूर्ति नियंत्रित की जाती है। वहीं, OG Kush गांजे की एक विशेष किस्म है, जो 1990 के दशक में कैलिफोर्निया की कैनबिस संस्कृति से जुड़ी रही है। इसकी पहचान मिट्टी और चीड़ जैसी गंध तथा तेज नशीले प्रभाव से होती है। अमेरिकी हिप-हॉप संस्कृति ने भी इसकी लोकप्रियता बढ़ाई।
OG का अर्थ 'Original Gangster', 'Ocean Grown' या 'Original Grower' बताया जाता है। हालांकि, OG एक किस्म है, जबकि हाइड्रोपोनिक्स खेती की तकनीक है। भारतीय अवैध बाजार में दोनों शब्द कभी-कभी एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल होते हैं। इन नामों से उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता, क्षमता या उत्पत्ति की पुष्टि नहीं होती।
1,300 रुपये वाला गांजा अब 3,000 रुपये प्रति ग्राम
रिपोर्ट के अनुसार, पहले प्रीमियम गांजा लगभग 1,000 से 1,300 रुपये प्रति ग्राम मिलता था। अब कुछ विक्रेता इसकी कीमत 3,000 रुपये प्रति ग्राम बता रहे हैं। इसके मुकाबले स्थानीय गांजे की कुछ किस्में लगभग 2,000 रुपये में 20 ग्राम तक मिलने का दावा है। ये अवैध बाजार के अनुमान हैं, आधिकारिक दरें नहीं।
प्रीमियम गांजे का इस्तेमाल अपेक्षाकृत संपन्न ग्राहकों तक सीमित माना जाता है। एक ग्राम से आमतौर पर चार-पांच जॉइंट बनाए जाते हैं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि देश की आबादी का महज 0.1 प्रतिशत हिस्सा भी इसे खरीद सके, तो बाजार लाखों ग्राहकों और सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इंडिया टुडे द्वारा पूछे गए दर्जनों लोगों में लगभग आधे ने कभी न कभी गांजा इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की। कानूनी और गोपनीयता संबंधी कारणों से उनकी पहचान छिपाई गई।
दिल्ली-NCR में ड्रग्स की सप्लाई पर सख्ती
नोएडा के एक कथित विक्रेता ने दिल्ली-NCR की स्थिति को 'ड्रग्स का लॉकडाउन' बताया। उसके अनुसार, नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के बीच बढ़ती जांच से आवाजाही मुश्किल हुई है।
पूर्वी दिल्ली के विक्रेता अली ने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल से आने वाली सप्लाई एक महीने से ज्यादा समय से प्रभावित है। अंतरराज्यीय सीमाओं और नेपाल बॉर्डर पर निगरानी बढ़ी है। हिमाचल से लौटने वाले पर्यटक वाहनों की भी जांच हो रही है। इडुक्की, शिलांग, मैंगो और स्थानीय गांजा बेचने का दावा करने वाले अली ने फिलहाल बिक्री रोक दी है। उसके मुताबिक, दूर तक माल भेजना जोखिम भरा है, हालांकि ग्राहकों के फोन लगातार आ रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई से तस्करों को बड़ा नुकसान
दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के डीसीपी गौरव गुप्ता ने प्रीमियम गांजे की कमी को राष्ट्रीय नशाविरोधी अभियान और लगातार छापेमारी से जोड़ा।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिल्ली कस्टम विभाग ने लगभग 140 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत 140 करोड़ रुपये थी। बेंगलुरु में भी इसी दौरान बड़ी बरामदगी हुई। डीसीपी के अनुसार, महंगी खेप पकड़े जाने से तस्करों को भारी आर्थिक नुकसान होता है, जिससे सप्लाई प्रभावित होती है।
डिलीवरी ऐप्स से भी होती है तस्करी
जुलाई 2025 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाइड्रोपोनिक गांजे को कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बताया था। उन्होंने थाईलैंड और अमेरिका के कुछ हिस्सों में कैनबिस की उपलब्धता तथा कूरियर और डाक सेवाओं के दुरुपयोग का उल्लेख किया था।
डीसीपी गुप्ता ने बताया कि पुलिस Porter जैसी डिलीवरी सेवाओं के अधिकारियों के साथ तीन बैठकें कर चुकी है। डिलीवरी कर्मचारियों के पास पैकेट स्कैन करने की सुविधा नहीं होने से संदिग्ध सामान पकड़ना चुनौतीपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद डिलीवरी सेवाओं के दुरुपयोग का यह तरीका बढ़ा।
ड्रग टेस्टिंग से भी बढ़ी चिंता
मुंबई के एक उपभोक्ता ने बताया कि गांजा पूरी तरह गायब नहीं हुआ, लेकिन पुलिस जांच और त्वरित ड्रग टेस्ट का डर बढ़ गया है। दिसंबर 2025 में गुजरात के सरखेज-गांधीनगर हाईवे पर संदिग्ध वाहन चालकों की लार के नमूने लेकर कैनबिस, कोकीन, एम्फेटामिन और ओपिऑइड की जांच की गई थी। एक व्यक्ति ने दावा किया कि सितंबर में बेंगलुरु में उसका परिचित ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद कथित तौर पर पांच लाख रुपये की रिश्वत देकर बचा। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य
सितंबर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने बताया कि 2014 से 2024 के बीच 1.19 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, 48.66 लाख किलोग्राम से अधिक ड्रग्स नष्ट किए गए। नशामुक्त भारत अभियान 2021 में शुरू हुआ था। भारत के NDPS अधिनियम, 1985 के तहत गांजा और चरस प्रतिबंधित हैं, जबकि पत्तियों से बनी भांग की कानूनी स्थिति अलग है।
क्या खत्म हो जाएगा अवैध गांजे का बाजार?
एक कस्टम अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ड्रग्स की जब्ती और उन्हें नष्ट करने की सार्वजनिक घोषणाएं सरकार के नशाविरोधी अभियान का प्रचार पक्ष भी हैं। पहले पुलिस हिरासत में जब्त गांजा चूहों द्वारा खाए जाने जैसे दावे भी सामने आ चुके हैं। डीसीपी गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की सीमाओं पर कई रास्ते पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। मुंडका और कंझावला के बीच कम से कम 10 ऐसे रास्ते हैं। हालांकि, तस्करी के मार्ग बदलने की पुष्टि उन्होंने नहीं की।
विशेषज्ञ स्तर पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई से नशीले पदार्थों की खपत स्थायी रूप से घटेगी या नहीं। मांग बनी रहने पर तस्कर दूसरे स्रोत तलाश सकते हैं और उपभोक्ता सस्ते विकल्प अपना सकते हैं। फिलहाल दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में प्रीमियम गांजे का अवैध बाजार दबाव में है, लेकिन इसकी पूरी तरह समाप्ति का दावा करना जल्दबाजी होगी।
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