Internet Shutdown Apology: सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अदालत की अवमानना के नोटिस पर बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने रायसीना हिल्स के 4 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे मोबाइल इंटरनेट बंद करने के फैसले को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया। साथ ही कहा कि अदालत के किसी निर्देश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया।
गृह सचिव बोले- इंटरनेट बंद करना कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी था
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चार पन्नों के हलफनामे में कहा कि मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को ही निलंबित किया गया था। वाई-फाई, ब्रॉडबैंड और अन्य दूरसंचार सेवाओं पर रोक नहीं लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए यह कदम जरूरी लगा। दरअसल, 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रखने का निर्देश दिया था। इसके कथित उल्लंघन को लेकर कोर्ट ने गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अध्यक्ष को अवमानना का नोटिस जारी किया था।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से आदेश में संशोधन की मांग की
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में 20 जुलाई 2026 के दिल्ली पुलिस के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया गया था। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रदर्शन के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 11 अक्टूबर 2026 के आदेश में संशोधन करने की मांग की, ताकि आवश्यक परिस्थितियों में कानून और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए इंटरनेट सेवाएं निलंबित की जा सकें। केंद्र ने दोहराया कि रोक केवल मोबाइल इंटरनेट पर थी, वाई-फाई और ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू थीं।
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