China: चीन के रक्षा शोधकर्ताओं ने भविष्य के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाले 60 टन के मुख्य युद्धक टैंक का एक कॉन्सेप्ट पेश किया है। जून 2026 में चीनी जर्नल Acta Armamentarii में प्रकाशित शोध में 10 मेगावाट-क्लास छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और 50 मेगाजूल की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन वाले वाहन की कल्पना की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें प्रोजेक्टाइल करीब 3.5 किमी प्रति सेकंड की गति से दागे जाने और लगभग 450 किमी तक की रेंज का लक्ष्य रखा गया है।
तीन चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम को सीधे परमाणु टैंक के रूप में विकसित करने के बजाय तीन चरणों में आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।
पहला चरण—2035 से पहले: मौजूदा बख्तरबंद प्लेटफॉर्म पर 10 मेगाजूल की रेलगन लगाने का प्रस्ताव है, जिसकी अनुमानित रेंज करीब 150 किमी होगी। इसके लिए 1,500 हॉर्सपावर का डीजल जनरेटर, सुपरकैपेसिटर और फ्लाईव्हील आधारित ऊर्जा भंडारण तथा करीब 2 मेगाजूल की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक आर्मर का इस्तेमाल प्रस्तावित है।
दूसरा चरण—2045 तक: रेलगन की ऊर्जा क्षमता 20 मेगाजूल और अनुमानित रेंज करीब 300 किमी करने की योजना है। इसमें 2,000 हॉर्सपावर का डीजल जनरेटर और करीब 5 टन एडवांस्ड एनर्जी स्टोरेज शामिल होगा। सॉलिड-स्टेट बैटरी, सुपरकंडक्टिंग स्टोरेज और वाहन माइक्रोग्रिड जैसी तकनीकों पर जोर होगा। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक आर्मर की क्षमता करीब 10 मेगाजूल प्रस्तावित है।
तीसरा चरण—2045 के बाद: प्रस्तावित अंतिम कॉन्फिगरेशन में करीब 2 घन मीटर जगह में फिट होने वाला 10 मेगावाट-क्लास लिक्विड-मेटल-कूल्ड SMR वाहन को ऊर्जा देगा। इसके साथ 50 मेगाजूल की रेलगन और करीब 450 किमी की अनुमानित मारक क्षमता का लक्ष्य है।
सबसे बड़ी चुनौती रिएक्टर और ऊर्जा प्रबंधन
इस कॉन्सेप्ट को वास्तविक वाहन में बदलना आसान नहीं होगा। रिएक्टर को सीमित वजन और जगह में सुरक्षित तरीके से फिट करना, चालक दल को विकिरण से बचाना, गर्मी को नियंत्रित करना और रेलगन के लिए कम समय में भारी ऊर्जा उपलब्ध कराना बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं। वाहन को ऑफ-रोड झटकों के बीच भी सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगा। अमेरिकी नौसेना का प्रयोगात्मक रेलगन कार्यक्रम करीब 32 मेगाजूल के स्तर तक पहुंचा था, लेकिन बाद में धीमा पड़ गया। प्रस्तावित 50 मेगाजूल क्षमता इससे अधिक होगी।
अभी सिर्फ शोध अवधारणा
यदि ऐसा सिस्टम कभी विकसित होता है तो पारंपरिक टैंक की भूमिका से अलग, यह लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाले प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर सकता है। हालांकि, शोध में अभी कई चरणों के सिमुलेशन और वाहन-स्तरीय परीक्षण की जरूरत बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह फिलहाल कोई घोषित सैन्य उत्पादन कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक शोध अवधारणा है। परमाणु रिएक्टर की सुरक्षा, वजन, लागत, रखरखाव और युद्ध के दौरान संभावित नुकसान जैसे सवाल इसकी व्यवहारिकता के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
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