CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य, कानून के शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उत्तर प्रदेश में निवेश जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए हर दावे के पीछे तथ्य, साक्ष्य और तर्क होना जरूरी है।
विकसित भारत को मुकदमे के उदाहरण से समझाया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि अगर केस नंबर 2047 हो और उसका विषय विकसित भारत हो, तो इस मामले में 140 करोड़ भारतीय याचिकाकर्ता होंगे। उनकी ओर से दलील रखने वाले अधिवक्ता को प्रत्येक दावे के समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करने होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के भविष्य से जुड़े दावों को प्रमाणों के आधार पर साबित करना जरूरी है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
सच बोलने और लगातार अध्ययन करने पर दिया जोर
योगी आदित्यनाथ ने प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा, “सत्यं वद: धर्मं चर: स्वाध्यायान्मा प्रमदः।” इसका अर्थ है सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और अध्ययन में कभी आलस्य नहीं करना। उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के लिए इससे बेहतर कार्य-निर्देश नहीं हो सकता। दीक्षांत समारोह की परंपरा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र भले ही नए गाउन पहनकर उपाधि प्राप्त करते हों, लेकिन भारत की दीक्षांत शिक्षा परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में ऐसी शिक्षाओं को लंबे समय से जीवन का हिस्सा बनाया जाता रहा है।
आपातकाल और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने देश के लोकतांत्रिक इतिहास और न्यायपालिका की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था। इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था। योगी आदित्यनाथ ने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय न्यायमूर्ति खन्ना को इसकी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इतिहास में उनकी असहमति का महत्व बना रहा। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें न्यायमूर्ति खन्ना की असहमति को सही माना गया था। उन्होंने कहा कि 1975 के दौर ने देश को यह समझाया कि ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक का कानून अलग-अलग अवधारणाएं हैं। लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश की छवि और निवेश पर भी बोले सीएम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पुरानी छवि का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले राज्य में निवेश की बात करने पर लोग सवाल उठाते थे। उस समय कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, निर्यात और स्पष्ट नीतियों को लेकर चिंताएं जताई जाती थीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि राज्य में सुधार संभव नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने संसद में भी ऐसी सोच देखी थी, जहां उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर निराशा जताई जाती थी। दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने कानून के विद्यार्थियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए विकसित भारत के लक्ष्य, सत्यनिष्ठा, निरंतर अध्ययन और लोकतंत्र में कानून के शासन के महत्व पर जोर दिया।
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