Delhi Tiranga March: दिल्ली में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभिजीत दिपके की हिरासत को 'अघोषित इमरजेंसी' बताया। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने पर सवाल खड़े किए। जानकारी के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के दौरान करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
केजरीवाल बोले- तिरंगे से परेशानी है तो पाकिस्तान चले जाएं
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे? जिन्हें भारतीय तिरंगे से परेशानी है, वो पाकिस्तान चले जाएं।" केजरीवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में तिरंगा मार्च को लेकर पुलिस की कार्रवाई जारी है। इस मार्च का आह्वान CJP ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे।
ममता बनर्जी ने बताया 'अघोषित इमरजेंसी'
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इस कार्रवाई को 'अघोषित इमरजेंसी' करार दिया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि युवाओं को डराने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, आजादी और असहमति के अधिकार के लिए लड़ाई जारी रहेगी।
स्टालिन ने पूछा- अभिजीत दिपके और नेहा बोरा कहां हैं
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अभिजीत दिपके और नेहा बोरा कहां हैं। स्टालिन ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों के ठिकाने की जानकारी नहीं देना गैरकानूनी और अमानवीय है। उन्होंने दोनों को तत्काल रिहा करने की मांग की। वहीं, CPI सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि यह आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत और नेहा हिरासत में
CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का आह्वान किया था। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियां हुई हैं।
मार्च शुरू होने से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद पुलिस ने मंडी हाउस से नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
दिल्ली पुलिस ने लागू किए प्रतिबंध, सेंट्रल पार्क बंद
तिरंगा मार्च को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने भी प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद रखने की जानकारी दी थी। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई के दौरान करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
छात्र प्रदर्शनों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा, "हमारे पास संस्थान और एजेंसियां हैं, जो इस पर नजर रख रही हैं और वे अपना काम कर रही हैं।" दिल्ली में तिरंगा मार्च को लेकर पुलिस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केजरीवाल, ममता बनर्जी और स्टालिन ने हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रदर्शनकारी SIR में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।
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