SSR Voter List 2027: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश समेत 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर (SSR) का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची में गलतियों को सुधारने और अपात्र प्रविष्टियों की जांच करने का काम किया जाएगा। आयोग के 15 अक्टूबर 2026 के निर्देश के मुताबिक, इस प्रक्रिया में एक जनवरी 2027 को पात्रता तारीख माना जाएगा। संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने और पात्र नागरिकों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपी समेत इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SSR
चुनाव आयोग के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गोवा, मणिपुर, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं। इनमें ऐसे राज्य भी हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
12 नवंबर को जारी होगी मसौदा मतदाता सूची
आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए तारीखें तय कर दी हैं। मतदान केंद्रों के युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्था की प्रक्रिया दो नवंबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इसके बाद 12 नवंबर को एकीकृत मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होगी। कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद चार जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर रहेगा खास ध्यान
चुनाव आयोग ने उन पात्र नागरिकों के पंजीकरण पर जोर दिया है, जिनका नाम अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है। पहली बार मतदान के योग्य होने वाले युवाओं को भी इस अभियान के तहत पंजीकरण का अवसर मिलेगा। एक जनवरी 2027 के अलावा एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर 2027 की आगामी पात्रता तारीखों के लिए भी अग्रिम आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। हालांकि, इन तारीखों से संबंधित आवेदनों का निस्तारण निर्धारित तिमाही में तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
फॉर्म-6, 7 और 8 से कर सकेंगे आवेदन
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाताओं के लिए फॉर्म-6ए का इस्तेमाल किया जाएगा। किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरना होगा। वहीं, पता बदलने, व्यक्तिगत विवरण में सुधार कराने, मतदाता पहचान पत्र बदलवाने और दिव्यांग मतदाता के रूप में चिह्नित होने के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जा सकेगा। मतदाता निर्वाचन आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल और ईसीआईनेट ऐप के जरिए भी आवेदन कर सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार संख्या देना स्वैच्छिक है। आधार उपलब्ध नहीं कराने के कारण किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह, केवल इस वजह से किसी मतदाता का नाम हटाया भी नहीं जा सकता।
नाम हटाने से पहले होगा सत्यापन
मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने की आशंका को रोकने के लिए आयोग ने विशेष सुरक्षा उपाय तय किए हैं। यदि किसी मतदान केंद्र पर कुल मतदाताओं के दो प्रतिशत से अधिक नाम हटाने का मामला सामने आता है, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से दोबारा सत्यापन करना होगा। इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्तिकर्ता है, तो संबंधित मामलों की भी व्यक्तिगत जांच की जाएगी। मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। ऐसे मामलों में क्षेत्रीय सत्यापन और जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। जहां किसी मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव होगा, वहां नियमानुसार संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना भी जरूरी होगा।
मतदान केंद्रों की संख्या और व्यवस्था में भी होगा बदलाव
आयोग ने निर्देश दिया है कि सामान्य परिस्थितियों में एक मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए। नए मतदान केंद्र बनाने या मौजूदा केंद्रों में बदलाव करने से पहले भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। मतदान केंद्रों की सीमाएं स्पष्ट रखने और एक ही परिवार के सदस्यों के नाम एक ही अनुभाग में रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा, मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी न हो, इसका ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। मतदान केंद्रों से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाएगा।
राजनीतिक दलों के साथ साझा होंगी दावे-आपत्तियों की सूचियां
चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए हैं। दावों और आपत्तियों की सूचियां राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाएंगी और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएंगी। राजनीतिक दलों को मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। आयोग ने महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, अनुसूचित जनजातियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, बीमार लोगों, गरीबों और अन्य वंचित समूहों के पंजीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा है। जरूरत के मुताबिक हेल्प डेस्क और विशेष शिविर भी लगाए जा सकेंगे।
इन राज्यों में बाद में घोषित होगा SSR का कार्यक्रम
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना में एसएसआर का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जारी है या हाल ही में पूरा हुआ है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाद में जारी किया जाएगा।
चुनाव आयोग का यह अभियान मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाने के साथ पात्र नागरिकों को मताधिकार से जोड़ने पर केंद्रित है। आयोग ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटे नहीं और किसी अपात्र प्रविष्टि को बनाए रखने या किसी का नाम गलत तरीके से हटाने की स्थिति पैदा न हो।
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