India JD Vance H1B Remarks: भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की H-1B वीजाधारकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताने वाली टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे ‘अनुचित’ और ‘बेहद आपत्तिजनक’ करार देते हुए कहा कि भारतीय पेशेवर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, शोध और नवाचार में अहम योगदान देते हैं। मंत्रालय ने चेताया कि अमेरिका के हालिया कदम दोनों देशों के साझा आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा है ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में लाखों भारतीयों को अनुबंधित मजदूरों के रूप में मॉरीशस, फिजी, कैरेबियाई देशों और दक्षिण अफ्रीका समेत ब्रिटिश उपनिवेशों में भेजा गया था। कई मजदूरों को शोषणकारी अनुबंधों के तहत कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा और उनकी स्वतंत्रता सीमित थी।
वेंस ने अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा आठ कंपनियों के PERM कार्यक्रम पर रोक का समर्थन करते हुए कहा था कि कंपनियों को विदेशी ‘बंधुआ मजदूरों’ की जगह अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी देनी चाहिए।
आठ कंपनियों के आवेदन रोके गए
रोक के दायरे में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कैपजेमिनी, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट शामिल हैं।
PERM और H-1B में क्या अंतर है?
PERM प्रक्रिया के तहत कंपनियों को साबित करना होता है कि पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कार्य परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद पात्र कर्मचारियों के रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
H-1B वीजा विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PERM पर रोक से मौजूदा H-1B वीजा या उनके आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती, लेकिन संबंधित कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया में देरी या रुकावट आ सकती है।
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