Sunday, Oct 04

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Indira Ekadashi 2026: क्या इंदिरा एकादशी का व्रत पितरों को दिलाता है मुक्ति? जानें धार्मिक मान्यता

Indira Ekadashi 2026 Date: पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत करने से उसका पुण्य पूर्वजों को समर्पित किया जा सकता है। धार्मिक कथाओं में इसे पितरों के कल्याण, आत्मशांति और मुक्ति से जोड़कर देखा गया है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस एकादशी से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं।

इंदिरा एकादशी का पितरों से क्या संबंध है?

इंदिरा एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है और यह पितृ पक्ष के बीच आती है। इसी वजह से पितरों के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर उसका पुण्य फल पितरों को अर्पित करने से उनके कल्याण की कामना की जाती है।

पौराणिक मान्यता में कहा गया है कि यदि किसी पूर्वज को उनके कर्मों के कारण कष्ट भोगना पड़ रहा हो, तो इंदिरा एकादशी के व्रत और पूजा से उन्हें राहत मिलने की कामना की जाती है। इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

भगवान विष्णु की पूजा का है विशेष महत्व

इंदिरा एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ कर्मों का पुण्य पितरों के नाम समर्पित किया जा सकता है।

कई परंपराओं में व्रत के पुण्य फल को पूर्वजों के लिए अर्पित करने का संकल्प लिया जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मशांति और सद्गति की कामना पूरी होती है।

इंदिरा एकादशी से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं

पितृ पक्ष की महत्वपूर्ण एकादशी: पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इंदिरा एकादशी को पूर्वजों के कल्याण के लिए विशेष माना जाता है।

पितरों की शांति की कामना: इस दिन व्रत और पूजा के जरिए पितरों की आत्मशांति और सद्गति के लिए प्रार्थना की जाती है।

विष्णु आराधना: इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत को विशेष फलदायी माना जाता है।

पुण्य पितरों को समर्पित करना: व्रत के बाद उसके पुण्य फल को पितरों के नाम अर्पित करने का संकल्प लेने की परंपरा है।