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जंतर-मंतर अब नहीं बनेगा धरना-प्रदर्शन का केंद्र, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला; इन 3 जगहों पर ही होगा आंदोलन

by | Oct 12, 2026 | Cover Story Featured

Jantar Mantar Protest Ban: दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इसके बाद अब यहां धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए तीन अन्य स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां कई ऐसे प्रदर्शन हुए, जिन्होंने देश की राजनीति और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित किया। ऐसे में इसे प्रदर्शन स्थल के रूप में सूची से हटाने का फैसला चर्चा में है।

सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला, तीन जगहों पर होंगे प्रदर्शन

गृह मंत्रालय ने नागरिक अधिकारों और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए उचित स्थान निर्धारित करने के उद्देश्य से एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है। अब दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को निर्धारित किया गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने से संबंधित विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। यह निर्णय 28 अप्रैल 2022 को जारी आदेश में आंशिक संशोधन के तहत लिया गया है। सरकार के इस कदम के बाद अब जंतर-मंतर पर पहले की तरह विरोध-प्रदर्शन आयोजित नहीं किए जा सकेंगे।

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके बोले- पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर

सरकार के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है, लेकिन अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा। दिपके ने कहा, "उन्होंने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया है। हां, अब यह विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं रही, क्योंकि इसे युद्ध का मैदान बना दिया गया था। अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!" उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद जंतर-मंतर को लेकर सरकार के फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज होने की संभावना है। यह स्थान लंबे समय से उन लोगों की आवाज उठाने का मंच रहा है, जो अपनी मांगों को सरकार और देश के सामने रखना चाहते हैं।

कई ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा है जंतर-मंतर

जंतर-मंतर का नाम देश के कई चर्चित आंदोलनों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2012 में दिल्ली में हुए सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद निर्भया आंदोलन के दौरान यह स्थान विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना था। इसके बाद भी अलग-अलग मुद्दों पर यहां प्रदर्शन होते रहे। करीब 2015 के दौरान वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को लेकर आंदोलन हुआ। वर्ष 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर यहां प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों में भी जंतर-मंतर की अहम भूमिका रही।

किसान आंदोलन से लेकर पहलवानों के धरने तक बना केंद्र

वर्ष 2021 में किसान आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर किसान संसद का आयोजन किया गया था। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों को उठाने के लिए यहां जुटकर विरोध दर्ज कराया।

इसके बाद वर्ष 2023 में भारतीय कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर पहलवानों ने यहां लंबे समय तक धरना दिया। इस प्रदर्शन ने भी देशभर में लोगों का ध्यान खींचा। जंतर-मंतर पर समय-समय पर हुए इन आंदोलनों ने इसे विरोध दर्ज कराने के एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच के रूप में पहचान दिलाई। अब सरकार के नए फैसले के बाद दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले लोगों को निर्धारित तीन स्थानों का रुख करना होगा। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था के तहत धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाती है।

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