Latur Drought: महाराष्ट्र का लातूर जिला सूखे की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने चार सूत्रीय योजना तैयार की है। इसमें पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा, ग्रामीण रोजगार और जल स्रोतों को दोबारा उपयोगी बनाना शामिल है। कलेक्टर डॉ. भरत बस्तेवाड़ ने कहा कि लोगों तक पीने का पानी पहुंचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
पहले सरकारी जल स्रोतों की होगी जांच
प्रशासन हर गांव में सरकारी कुओं और बोरवेल की स्थिति का आकलन करेगा। अगर इनसे पानी की जरूरत पूरी नहीं होती है तो निजी कुओं और बोरवेल की पहचान की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनका अधिग्रहण भी किया जा सकता है। इसके बाद अतिरिक्त कुएं और बोरवेल तलाशे जाएंगे। फिर भी पानी की कमी रहती है तो टैंकरों से आपूर्ति की जाएगी।
वडवल नागनाथ में टंकियां लगाने की तैयारी
कलेक्टर ने चाकुर तहसील के वडवल नागनाथ का दौरा कर पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में लगभग 30 बोरवेल हैं, जिनमें 11 चालू मिले। प्रशासन यहां पांच से छह प्रमुख जगहों पर पानी की टंकियां लगाने की योजना बना रहा है। लोगों को तय समय के अनुसार दो-दो घंटे के स्लॉट में पानी दिया जाएगा।
चारे और रोजगार पर भी फोकस
प्रशासन गांवों में मौजूद चारे का रिकॉर्ड तैयार करेगा। इससे पता चलेगा कि उपलब्ध चारा कितने समय तक चल सकता है। पानी वाले इलाकों के ग्रामीणों को चारा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। चारा डिपो बनाने पर भी विचार हो रहा है। वहीं, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाबों और नालों से गाद निकालने, कुओं को फिर से उपयोगी बनाने और पुराने बोरवेल को रिचार्ज करने जैसे काम कराए जाएंगे।
जल स्रोतों को बचाने पर जोर
योजना का एक अहम हिस्सा जल संरक्षण है। प्रशासन मौजूदा जल स्रोतों को लंबे समय तक उपयोगी बनाने पर काम करेगा, ताकि गांवों को लगातार टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े। बता दें कि बारिश की कमी के बीच महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य की 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। सरकार ने फसल ऋण के पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत और बिजली बिल में सब्सिडी जैसे राहत उपायों की घोषणा भी की है।
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