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वित्त मंत्री सीतारमण ने फिर छेड़ी LTCG टैक्स पर बहस, जानें अभी क्यों उठा मुद्दा और क्या सरकार दे पाएगी राहत?

LTCG STT Tax Review India: शेयर बाजार के निवेशकों को आने वाले बजट में टैक्स से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की समीक्षा को लेकर चर्चा के संकेत दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और सरकार बजट 2027-28 की तैयारियों में जुटी है।

वित्त मंत्री ने टैक्स समीक्षा पर क्या कहा?

मंगलवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में निर्मला सीतारमण ने कहा कि STT को लेकर काफी चर्चा हो रही है और वह संबंधित पक्षों के विचार सुनने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने किसी टैक्स कटौती का वादा नहीं किया और आगामी बजट को देखते हुए सावधानी बरतने की बात कही। उनके बयान के बाद मंगलवार को सेंसेक्स 1,109 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 358.60 अंक या 1.60 प्रतिशत बढ़कर 22,721.95 पर पहुंच गया। IT शेयरों में तेजी ने भी बाजार को सहारा दिया, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी बिकवाली का दबाव बना रहा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ी चिंता

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 11 अक्टूबर तक भारतीय शेयरों से 44,166 करोड़ रुपये निकाले। इसके साथ 2026 में कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पूरे 2025 में यह आंकड़ा 1.66 लाख करोड़ रुपये था।

SBI रिसर्च ने इक्विटी पर LTCG टैक्स समाप्त करने और लंबी अवधि के निवेश की न्यूनतम सीमा दो या तीन साल करने का सुझाव दिया। रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा प्रवाह को अधिक स्थिर बनाने के उपायों की भी सिफारिश की गई।

भारत में कितना बढ़ चुका है शेयर बाजार पर टैक्स?

जुलाई 2024 में सरकार ने सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर LTCG टैक्स 10 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया था। सालाना छूट सीमा एक लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये की गई, जबकि निर्धारित वित्तीय संपत्तियों पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स 15 से 20 प्रतिशत हो गया।

सरकार ने इसे कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की पहल बताया था।

बजट 2026 में इक्विटी डेरिवेटिव्स पर STT भी बढ़ाया गया। एक अप्रैल 2026 से नई दरें लागू हुईं।

लेनदेनपुरानी दरनई दर
फ्यूचर्स0.02%0.05%
ऑप्शंस की बिक्री0.10%0.15%
एक्सरसाइज किए गए ऑप्शंस0.125%0.15%

LTCG टैक्स वास्तविक दीर्घकालिक मुनाफे पर लगता है, जबकि STT निर्धारित प्रतिभूति लेनदेन पर लाभ या नुकसान की परवाह किए बिना वसूला जाता है।

क्या ज्यादा टैक्स के कारण विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं?

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, विदेशी निवेशकों की निकासी, बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता और कुल टैक्स बोझ प्रमुख चिंताएं हैं। हालांकि, राहत देने से पहले राजस्व, वित्तीय क्षमता और अलग-अलग निवेशकों पर प्रभाव का आकलन जरूरी है। इंदिरा सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक नेवी विजय रामावत का कहना है कि LTCG, STCG और STT में बढ़ोतरी ने निवेश महंगा किया है, लेकिन विदेशी बिकवाली के लिए केवल टैक्स जिम्मेदार नहीं है।

ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर, रुपये की कमजोरी, महंगा कच्चा तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयरों का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण कारण हैं। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा कि हांगकांग और सिंगापुर जैसे बाजारों में सामान्यतः कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता। इससे भारत की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल टैक्स घटाने से विदेशी निवेश लौटने की गारंटी नहीं है।

टैक्स घटाने से सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ेगा?

मनोरंजन शर्मा के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इक्विटी LTCG टैक्स से 1,29,158 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2023-24 में यह राशि 72,249 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित सकल केंद्रीय कर राजस्व के मुकाबले यह लगभग 2.9 प्रतिशत है। हालांकि, ये पिछले वर्षों के आंकड़े हैं, भविष्य में टैक्स हटाने से होने वाले नुकसान का अनुमान नहीं।

वित्त वर्ष 2027 में STT से 73,700 करोड़ रुपये मिलने का बजटीय अनुमान है। समान लेनदेन आधार मानने पर इसमें 10 प्रतिशत कटौती से 7,370 करोड़ रुपये कम मिल सकते हैं। वास्तविक असर ट्रेडिंग गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

शर्मा ने स्पष्ट किया कि LTCG और STT अलग-अलग आधार पर लगते हैं, इसलिए इन्हें तकनीकी रूप से एक ही आय पर दोहरा कराधान नहीं कहा जा सकता। वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 4.3 प्रतिशत है। ऐसे में बड़ी टैक्स कटौती की भरपाई अन्य करों, खर्च में कटौती या उधारी से करनी पड़ सकती है। राज्यों की हिस्सेदारी को ध्यान में रखने पर केंद्र का शुद्ध राजस्व प्रभाव अलग होगा।

छोटे निवेशकों को कैसे मिल सकती है राहत?

विशेषज्ञों ने पूर्ण टैक्स समाप्ति के बजाय सीमित बदलाव सुझाए हैं। इनमें LTCG की सालाना छूट सीमा 1.25 लाख रुपये से बढ़ाना, 12.5 प्रतिशत दर कम करना, STT चरणबद्ध घटाना और तीन या पांच साल तक निवेश रखने वालों को सीमित रियायत देना शामिल है।

सिंघानिया के मुताबिक, पहले STT घटाने से ट्रेडिंग लागत कम हो सकती है और बाजार में तरलता तथा खरीद-बिक्री की कीमतों का अंतर बेहतर हो सकता है। शर्मा ने सरल टैक्स रिपोर्टिंग, पहले से भरे कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट, कम अनुपालन लागत और बेहतर निवेशक सुरक्षा का सुझाव भी दिया।

क्या मध्यम वर्ग पर बढ़ा LTCG का बोझ?

ClearTax के संस्थापक अर्चित गुप्ता के अनुसार, तीन वर्षों में डीमैट खातों की संख्या 13.2 करोड़ से बढ़कर 23.8 करोड़ हो गई। उन्होंने अपनी कंपनी के आंकड़ों के आधार पर बताया कि कैपिटल गेन्स घोषित करने वाले उपयोगकर्ताओं की हिस्सेदारी 14 से बढ़कर 38 प्रतिशत हुई। ITR-2 फाइलिंग 73.87 प्रतिशत और ITR-3 फाइलिंग 375 प्रतिशत बढ़ी।

ये आंकड़े ClearTax के उपयोगकर्ताओं के हैं, पूरे देश के करदाताओं के नहीं। गुप्ता के मुताबिक, LTCG अब बड़े निवेशकों के अलावा मध्यम वर्ग, युवा पेशेवरों और सेवानिवृत्त लोगों को भी प्रभावित करता है। टैक्स में राहत से परिवारों को निवेश पर मिलने वाला अधिक लाभ बचाने और चक्रवृद्धि वृद्धि का फायदा उठाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बढ़ता खुदरा निवेश सरकारी राजस्व नुकसान की भरपाई करेगा, यह निश्चित नहीं है।

क्या बजट 2027 में बदलेगी टैक्स व्यवस्था?

रामावत के अनुसार, मार्च 2026 में पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये से सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि शेयर बाजार में टैक्स राहत असंभव है। उन्होंने LTCG दर दोबारा 10 प्रतिशत करने को एक संभावित विकल्प बताया, लेकिन कहा कि विदेशी निवेश की वापसी बेहतर कॉरपोरेट कमाई, आकर्षक मूल्यांकन और स्थिर रुपये पर भी निर्भर करेगी।

विशेषज्ञों ने चेताया कि यदि निवेशक टैक्स राहत की उम्मीद पहले से बाजार कीमतों में शामिल कर लें और बजट में बदलाव न हो, तो निराशा से गिरावट आ सकती है। फिलहाल, निर्मला सीतारमण का बयान केवल समीक्षा पर चर्चा का संकेत है, कोई आधिकारिक नीतिगत घोषणा नहीं। सरकार को निवेशकों की राहत, विदेशी पूंजी आकर्षित करने और राजस्व जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा।

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