Pakistan: पाकिस्तान में रबी सीजन 2026-27 के दौरान सिंचाई के पानी की 22 प्रतिशत कमी होने का अनुमान है। पाकिस्तान की सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने चेतावनी दी है कि इससे पंजाब और सिंध प्रांतों में गेहूं समेत कई फसलों की खेती प्रभावित हो सकती है। हालांकि, पाकिस्तान लगातार भारत पर सिंधु नदी का पानी रोकने का आरोप लगाता रहा है, लेकिन उसके अपने जल नियामक ने इस संकट के पीछे बांधों में कम जल भंडारण और जलविद्युत परियोजनाओं में देरी को प्रमुख कारण बताया है।
रबी सीजन में पंजाब और सिंध पर संकट
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, IRSA ने 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक चलने वाले रबी सीजन के लिए 22 प्रतिशत जल कमी का अनुमान लगाया है। इसका असर गेहूं, चना, मसूर, जौ, सरसों, तंबाकू और तिलहन की खेती पर पड़ सकता है।
एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, देश की 80 प्रतिशत से अधिक कृषि सिंधु बेसिन की सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर है। ऐसे में पानी की कमी खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
पानी की कमी के पीछे क्या हैं कारण?
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के खरीफ सीजन में नदियों का वास्तविक जल प्रवाह अनुमान से 8 प्रतिशत और पिछले वर्ष से 22 प्रतिशत कम रहा। जल प्रवाह बारिश, बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने तथा तापमान पर निर्भर करता है। 30 सितंबर को जलाशयों में 12.014 मिलियन एकड़-फीट (MAF) के अनुमान के मुकाबले केवल 9.343 MAF पानी उपलब्ध था।
डॉन के मुताबिक, तारबेला बांध में निर्माण कार्य के दौरान WAPDA द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण 3 MAF से अधिक पानी संग्रहित नहीं हो सका। टनल-4 लो-लेवल आउटलेट और टनल-5 जलविद्युत परियोजना भी मार्च 2025 की निर्धारित समयसीमा तक पूरी नहीं हुईं। IRSA ने इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है। तारबेला में प्रतिबंधों के चलते मंगला बांध से अधिक पानी छोड़ना पड़ा, जिससे रबी सीजन से पहले उसका भंडारण प्रभावित हुआ।
किस प्रांत को कितना पानी मिलेगा?
7 अक्टूबर की बैठक में IRSA की सलाहकार समिति ने पंजाब और सिंध के लिए 22 प्रतिशत कमी मंजूर की, जबकि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को कटौती से छूट दी गई।
पानी का आवंटन इस प्रकार है:
- पंजाब: 15.564 MAF
- सिंध: 11.748 MAF
- बलूचिस्तान: 1.171 MAF
- खैबर पख्तूनख्वा: 0.710 MAF
आंतरिक आकलन में कमी 26 प्रतिशत तक बताई गई थी, लेकिन सिंध की आपत्तियों के बाद इसे 22 प्रतिशत रखा गया। IRSA के अनुसार, यह अनुमान सहमत जल प्रवाह और परिचालन मानकों पर आधारित है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा होगी।
गेहूं उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर खतरा
पिछले रबी सीजन में पानी की अनुमानित कमी नहीं होने के बावजूद पाकिस्तान को 20 लाख टन से अधिक गेहूं की कमी झेलनी पड़ी थी। डॉन के अनुसार, 29.7 मिलियन टन उत्पादन लक्ष्य और 31.9 मिलियन टन घरेलू खपत के मुकाबले उत्पादन लगभग 27.5 मिलियन टन रहा।
सरकार ने 10 लाख टन गेहूं आयात करने का आदेश दिया है। पहले चरण में 7.5 लाख टन की आपूर्ति नवंबर में प्रस्तावित है। पिछले रबी सीजन में बांधों में लगभग 13 MAF पानी था, जो मौजूदा स्तर से करीब 27 प्रतिशत अधिक था। इस बार कम सिंचाई जल से गेहूं की पैदावार और प्रभावित होने की आशंका है।
भारत पर आरोप, लेकिन घरेलू समस्याएं बनी वजह
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि स्थगित कर दी थी और ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। हालांकि, संधि स्थगित होने का अर्थ पाकिस्तान की ओर नदियों का प्रवाह रोकना नहीं है। भारत ने नियमित जल संबंधी आंकड़े साझा करने और पूर्व सूचना देने जैसे संधि दायित्व निलंबित किए हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में सिंधु जल मोड़ने के किसी भी प्रयास को युद्ध जैसी कार्रवाई बताया था।
वहीं, 6 अक्टूबर को वियना के अंतरराष्ट्रीय जल संगोष्ठी में विदेश मंत्री इशाक डार ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को उसके हिस्से के पानी से वंचित करने का क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि, IRSA के आकलन में मौजूदा संकट के प्रमुख कारण कम जल भंडारण और अधूरी घरेलू परियोजनाएं बताई गई हैं, न कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित करना।
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