Pakistan: पाकिस्तान में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना देखने वाली 20 वर्षीय गोल्ड मेडलिस्ट लाइबा एजाज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव 9 अक्टूबर को इस्लामाबाद के G-10 सेक्टर के साप्ताहिक बाजार में एक पेड़ से दुपट्टे के सहारे लटका मिला। शुरुआती रिपोर्टों में आत्महत्या की आशंका जताई गई है। परिवार का आरोप है कि अमेरिकी यूनिवर्सिटी में दाखिले, स्कॉलरशिप और वीजा दिलाने के नाम पर उनसे 93 लाख पाकिस्तानी रुपये की ठगी की गई।
अमेरिकी समाचार संस्थान द मीडिया लाइन और पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, पुलिस मौत की परिस्थितियों और कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
पिता ने बेची जमीन, मां ने गिरवी रखे गहने
पंजाब प्रांत के सरगोधा की रहने वाली लाइबा इस्लामाबाद की इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी से फिजिक्स ग्रेजुएट और गोल्ड मेडलिस्ट थीं। वह अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल कर वैज्ञानिक बनना चाहती थीं। हार्वर्ड में पढ़ने के लिए उन्होंने सऊदी अरब की स्कॉलरशिप भी ठुकरा दी थी।
लाइबा के पिता 1994 से इस्लामाबाद की सड़कों पर दूध और दही बेचते हैं। सीमित शिक्षा और आमदनी के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। लाइबा के सपने के लिए उन्होंने घर बनाने के उद्देश्य से खरीदी जमीन बेच दी, जबकि उनकी मां ने गहने गिरवी रख दिए। सात भाई-बहनों में लाइबा सबसे छोटी थीं। उनकी बड़ी बहन चीन में स्कॉलरशिप पर पढ़ चुकी हैं और अब लाहौर की एक बड़ी चीनी कंपनी में अनुवादक हैं।
हार्वर्ड में दाखिले के नाम पर 93 लाख की ठगी
परिवार के मुताबिक, मोहम्मद नौमान नामक व्यक्ति ने खुद को विदेशी शिक्षा सलाहकार बताकर हार्वर्ड में एडमिशन, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने का भरोसा दिया। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के अनुसार, आरोपियों ने परिवार से 93 लाख पाकिस्तानी रुपये लिए। इनमें 29 लाख लाइबा के बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर हुए, जबकि बाकी रकम नकद दी गई। आरोप है कि नौमान ने फर्जी एडमिशन लेटर, स्कॉलरशिप दस्तावेज और फीस भुगतान की रसीदें उपलब्ध कराईं। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो सका।
परिवार का आरोप है कि नौमान ने खुद को इस्लामाबाद हाई कोर्ट समेत विभिन्न संस्थानों से जुड़ा अधिकारी बताया था। उसने अमेरिका में रहने वाली एक महिला के जरिए स्कॉलरशिप दिलाने का भी दावा किया।
पिता को ठगी के बारे में बताने से किया था मना
लाइबा के मामा अमजद उर रहमान ने द मीडिया लाइन को बताया कि परिवार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिकी दूतावास में अपने संपर्कों के जरिए दस्तावेजों की जांच कराई, लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हुई। लाइबा के बहनोई जैद बिन अफजल के मुताबिक, नौमान बार-बार वीजा इंटरव्यू टालता रहा। बाद में उसने 12 अक्टूबर को इंटरव्यू होने का दावा करते हुए उससे पहले बचे हुए 22 लाख रुपये मांगे।
तब तक लाइबा को कथित धोखाधड़ी का पता चल चुका था और वह बेहद परेशान थीं। अफजल के अनुसार, 9 अक्टूबर को घर से निकलने से पहले उन्होंने पिता को इस बारे में न बताने की गुजारिश की। उन्हें डर था कि यह खबर उनके पिता को गहरा सदमा पहुंचाएगी। बाद में अफजल को इस्लामाबाद के बाजार में लाइबा का शव मिला, जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
FIA महानिदेशक उस्मान अनवर ने 11 अक्टूबर को अरब न्यूज से मोहम्मद नौमान की गिरफ्तारी की पुष्टि की। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, FIA ने 10 अक्टूबर को नौमान और फातिमा सरवर के खिलाफ धोखाधड़ी, बेईमानी से संपत्ति हासिल करने के लिए उकसाने, अपराध में सहयोग और पाकिस्तान के इमिग्रेशन अध्यादेश की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।
एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने मिलकर फर्जी स्कॉलरशिप लेटर, यूनिवर्सिटी एडमिशन ऑफर और फीस रसीदें तैयार कीं। अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक और मुख्य आयुक्त को आरोपियों की गिरफ्तारी तथा कानून के अनुसार कड़ी सजा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शनिवार देर रात गृह मंत्री मोहसिन नकवी और गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
नकवी ने इसे मानव तस्करी, अवैध प्रवासन और वीजा धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई के बीच अधिकारियों के लिए अहम मामला बताया। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी, ठगी गई रकम वापस दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा दिया। फिलहाल FIA जांच जारी रखे हुए है। परिवार अपनी बेटी की मौत के मामले में न्याय और कथित ठगी में गंवाई गई रकम की वापसी की मांग कर रहा है।
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