Sunday, Oct 04

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Pitru Paksha 2026: आज है नवमी श्राद्ध, जानें तर्पण का शुभ समय और पूरी विधि

Navami Shraddha 2026: पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। पंचांग के अनुसार, आज यानी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को नवमी श्राद्ध किया जा रहा है। हिंदू धर्म में नवमी तिथि को विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि जिन परिजनों का निधन नवमी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इसी तिथि पर करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा नवमी को मातृ नवमी के रूप में भी जाना जाता है और इस दिन परिवार की दिवंगत महिलाओं का विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।

क्यों खास है नवमी श्राद्ध?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवमी तिथि मातृ शक्ति से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए इस दिन दिवंगत माता, दादी, नानी, पत्नी या परिवार की अन्य महिला सदस्यों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। हालांकि नवमी श्राद्ध सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। यदि परिवार में किसी व्यक्ति का निधन नवमी तिथि को हुआ है, तो उसके लिए भी इसी दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है। श्रद्धा के साथ किए गए तर्पण और श्राद्ध से पितरों का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।

नवमी श्राद्ध का शुभ समय

4 अक्टूबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक रहेगा। वहीं अपराह्न काल दोपहर 1:20 बजे से 3:42 बजे तक रहेगा। श्राद्ध कर्म के लिए अपराह्न काल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में परिवार अपनी परंपरा के अनुसार इस दौरान श्राद्ध कर सकता है।

नवमी श्राद्ध की विधि

इस दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पितरों का ध्यान करते हुए श्राद्ध का संकल्प लें। इसके बाद विधि-विधान से जल में तिल मिलाकर पितरों को तर्पण अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार पिंडदान और अन्य श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं। इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराने तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।

10 अक्टूबर को होगा पितृ पक्ष का समापन

साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से हुई थी। इसके बाद अलग-अलग तिथियों पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जा रहे हैं। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन पितरों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया।