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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी का ‘परसेप्शन वॉर’, संसद से सुप्रीम कोर्ट तक 3 स्टेप्स में बिछाई बिसात

by | Oct 12, 2026 | Featured

Rahul Gandhi Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA ने अपना विरोध तेज कर दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), फॉर्म-6 में बदलाव और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई अब संसद से सड़क और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष ने चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की इस रणनीति में तीन प्रमुख पड़ाव दिखाई देते हैं, संसद से राष्ट्रपति भवन तक विरोध, राजघाट पर सत्याग्रह और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष की राजनीतिक रणनीति और जनमत को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पहला स्टेप: संसद से राष्ट्रपति भवन तक विरोध प्रदर्शन

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सबसे पहले संसद से विरोध प्रदर्शन शुरू किया। विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रुख पर सवाल उठाते हुए मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जब विपक्षी नेताओं को आगे बढ़ने से रोका, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी के पास धरने पर बैठ गए। यह धरना करीब सात घंटे तक चला। इसके बाद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने राष्ट्रपति को कथित 'वोट चोरी' से लोकतंत्र को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने इस संबंध में दस्तावेज और सबूत मांगे। इस चरण में विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों को राजनीतिक विरोध के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं के सामने भी उठाने की कोशिश की।

दूसरा स्टेप: राजघाट पर सत्याग्रह से नैतिक संदेश

संसद और आकाशवाणी के पास प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गांधी की समाधि राजघाट का रुख किया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के सांसद कनॉट प्लेस में एकत्र हुए और बसों से राजघाट पहुंचे। वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद विपक्षी नेताओं ने शांतिपूर्ण धरना दिया। इस दौरान सरकार और चुनाव आयोग को सद्बुद्धि मिलने की प्रार्थना करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेने का संदेश दिया गया। राजघाट पर प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने अपनी लड़ाई को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित न दिखाते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ने की कोशिश की। राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने इस आंदोलन को एक साझा राजनीतिक मंच देने का प्रयास भी किया।

तीसरा स्टेप: सुप्रीम कोर्ट तक मार्च, कानूनी लड़ाई पर जोर

संसद से सड़क तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद विपक्ष ने अपनी मांगों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने का रास्ता चुना। राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता संविधान की प्रतियां लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च करते हुए आगे बढ़े। इस कदम के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर वह कानूनी लड़ाई भी लड़ेगा। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने SIR तथा फॉर्म-6 से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, विपक्ष की याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने और उनके फैसलों पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी शामिल है। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से की गई मांगें हैं; इन्हें अदालत का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 10 से 15 विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को परिसर के बाहरी सुरक्षा घेरे में स्थित फाइलिंग काउंटर पर याचिका जमा करने की अनुमति दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं और कानूनी राहत के लिए याचिका न्यायिक प्रक्रिया के तहत दाखिल की जा सकती है। उन्होंने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से प्रशासनिक स्तर पर व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार किया था।

संविधान की प्रति और 'डरो मत' के नारे से क्या संदेश देना चाहता है विपक्ष

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। हाथों में संविधान की प्रतियां लेकर मार्च निकालने के जरिए विपक्ष ने अपनी लड़ाई को संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश की।

इस राजनीतिक रणनीति का एक अहम पहलू जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाना है। विपक्ष का तर्क है कि जब उसे अपनी शिकायतों पर संस्थागत स्तर पर सुनवाई नहीं मिलती, तो अदालत और जनता के सामने अपनी बात रखना जरूरी हो जाता है। वहीं, 'डरो मत' जैसे नारों और संयुक्त प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने तथा सहयोगी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। इस तरह विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य केवल मांगें उठाना ही नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच अपनी राजनीतिक दलील को प्रमुखता से रखना भी है।

2027 के चुनाव से पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची का पुनरीक्षण विपक्ष की राजनीति में अहम मुद्दा बन गया है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इन विषयों को लगातार उठा रहे हैं और सरकार तथा आयोग से जवाब मांग रहे हैं। संसद से राष्ट्रपति भवन, राजघाट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची यह मुहिम विपक्ष की तीन स्तरों वाली रणनीति को सामने रखती है—राजनीतिक विरोध, नैतिक संदेश और न्यायिक चुनौती। इसके जरिए राहुल गांधी और INDIA गठबंधन चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना चाहते हैं। हालांकि, इस रणनीति से विपक्ष कितना राजनीतिक लाभ हासिल कर पाएगा और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे आगामी चुनावों में कितना असर डालेंगे, यह आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर जारी विवाद ने चुनावी निष्पक्षता के सवाल को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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