Ramzan Chand
Ramzan Chand: देशभर में रमजान के चांद के दीदार के साथ ही अब पाक महीने की शुरुआत हो गई है। चांद नजर आते ही मस्जिदों और इस्लामिक संस्थानों की ओर से रमजान शुरू होने का ऐलान कर दिया गया। इसके बाद से रोजेदारों में खास उत्साह देखने को मिला। रमजान को इस्लाम में सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है, जिसमें लोग रोजा रखकर इबादत करते हैं, नेकी के काम करते हैं और खुद को संयम में रखते हैं। रमजान के पहले दिन से ही रोजेदारों के लिए सबसे जरूरी जानकारी होती है सेहरी का सही वक्त और इफ्तार का समय। इसी वजह से लोग अपने शहर के अनुसार टाइम टेबल देखना शुरू कर देते हैं।
रमजान सिर्फ रोजा रखने का महीना नहीं, बल्कि यह आत्मसंयम, इबादत और दुआ का समय माना जाता है। इस महीने में अल्लाह की इबादत पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की जाती है, गलत आदतों से दूर रहने की कोशिश की जाती है,नमाज, तिलावत और दुआ का महत्व बढ़ जाता है, मान्यता है कि रमजान में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
सेहरी वह समय होता है जब रोजेदार सुबह फज्र की नमाज से पहले खाना-पीना पूरा करते हैं। इसके बाद दिनभर रोजा रखा जाता है। सेहरी में हल्का और पौष्टिक खाना खाने की सलाह दी जाती है ताकि दिनभर शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
इफ्तार वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है। आमतौर पर लोग खजूर और पानी से इफ्तार शुरू करते हैं, फिर नमाज के बाद भोजन करते हैं। इफ्तार के समय परिवार के साथ बैठना और जरूरतमंदों को खाना खिलाना भी एक अच्छी परंपरा मानी जाती है।
भारत में सेहरी और इफ्तार का समय हर शहर में अलग-अलग होता है, क्योंकि यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है। यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल, जयपुर, पटना, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में टाइम अलग होता है।
रमजान के पहले रोजे में लोग कुछ बातों का खास ध्यान रखते हैं। सेहरी का समय निकलने से पहले खाना पूरा कर लें, इफ्तार हमेशा सही समय पर करें ,नमाज और दुआ में नियमितता रखें।
रमजान में रात को तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है, जिसे खास अहमियत दी जाती है। लोग मस्जिदों में जमा होकर नमाज पढ़ते हैं और कुरआन की तिलावत करते हैं। यह महीना इंसान को खुद को बेहतर बनाने और अल्लाह के करीब जाने का मौका देता है।
देश में रमजान का चांद नजर आते ही अब रोजेदारों के लिए इबादत और संयम का पाक महीना शुरू हो गया है। इस दौरान सबसे जरूरी है कि लोग अपने शहर के अनुसार सेहरी और इफ्तार का सही समय देखकर ही रोजा रखें और खोलें। साथ ही, रमजान का असली संदेश है सबर, नेकी और इंसानियत।
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