Tuesday, Oct 06

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Shardiya Navratri 2026: 58 साल बाद नवरात्रि में बन रहा दुर्लभ महासंयोग, गजकेसरी और शश राजयोग से बढ़ेगा पर्व का महत्व

Shardiya Navratri 2026 Date: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को बेहद पवित्र पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साल 2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी और 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ इसका समापन होगा। इस बार नवरात्रि की शुरुआत कई ज्योतिषीय संयोगों के बीच हो रही है। घटस्थापना के समय हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग के साथ गजकेसरी योग बनने की बात कही जा रही है। इसके अलावा शनि की स्थिति से शश राजयोग का भी निर्माण होगा। यही वजह है कि इस बार की नवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है।

ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इसे ज्ञान, प्रतिष्ठा, आर्थिक उन्नति और बेहतर निर्णय क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक वार, नक्षत्र और योग का ऐसा संयोग लंबे अंतराल के बाद बन रहा है। इसी कारण 2026 की नवरात्रि की शुरुआत को खास माना जा रहा है।

58 साल बाद बन रहा गजकेसरी योग

नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर सूर्योदय के समय हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। इसी समय गुरु और चंद्रमा की स्थिति से गजकेसरी योग बनने की बात कही गई है।

30 साल बाद शश राजयोग का संयोग

नवरात्रि के दौरान शनि की स्थिति भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में मौजूद रहेंगे। शनि की इस विशेष स्थिति को पंच महापुरुष योगों में शामिल शश राजयोग से जोड़ा जाता है।

ज्योतिष में शश राजयोग को कर्म, अनुशासन, धैर्य, न्याय और स्थिरता से संबंधित माना जाता है। करीब तीन दशक बाद नवरात्रि के दौरान शनि की ऐसी स्थिति बनने की बात कही जा रही है। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में मेहनत और निरंतर प्रयासों का महत्व बढ़ जाता है। साधना, धार्मिक अनुष्ठान और अनुशासित जीवनशैली के लिए भी इस समय को उपयोगी माना जाता है।

गुरु और सूर्य की स्थिति भी रहेगी खास

नवरात्रि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और सूर्य के बीच भी शुभ संबंध बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, शिक्षा और विस्तार का कारक माना जाता है। वहीं सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है।

ऐसे में इन दोनों ग्रहों का अनुकूल संबंध धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्ञान से जुड़े कार्यों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का भी प्रभाव

2026 की शारदीय नवरात्रि में केवल गजकेसरी और शश राजयोग ही खास नहीं हैं। इस दौरान कई अन्य शुभ योग भी बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नवरात्रि के लगभग 4 से 5 दिनों में सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जबकि करीब 2 दिन अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग को नए और शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत सिद्धि योग को भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में इस बार की शारदीय नवरात्रि पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिहाज से खास मानी जा रही है।