Why Market Is Falling: अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में चले गए। शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में बिकवाली और तेज हो गई, जिससे कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8.57 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।
गुरुवार को सेंसेक्स 287.40 अंक की गिरावट के साथ 72,192.89 के स्तर पर खुला। वहीं, निफ्टी ने भी 76.75 अंक टूटकर 22,543.70 पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआत में बाजार ने संभलने की कोशिश की, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया।
बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र में कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4,71,86,380.74 करोड़ रुपये था। कारोबार के दौरान यह घटकर 4,63,28,901.87 करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेशकों की संपत्ति में लगभग 8,57,478.87 करोड़ रुपये की गिरावट आई। दोपहर करीब 1 बजे सेंसेक्स 786 अंक से ज्यादा नीचे 71,761 के आसपास कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर निफ्टी करीब 247 अंक फिसलकर 22,400 के स्तर से नीचे चला गया।
बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
- विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। 30 सितंबर को एफआईआई ने करीब 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, पिछले दो कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली 20,000 करोड़ रुपये से अधिक रही। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा है। - रुपये में कमजोरी
डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने का असर एशियाई मुद्राओं पर पड़ा है। भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले करीब 0.16 फीसदी कमजोर होकर 95.98 के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है। - India Vix में बढ़ोतरी
बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला India VIX करीब 5 फीसदी बढ़कर 14.13 पर पहुंच गया। VIX में तेजी से निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता का संकेत मिलता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार में तेज गिरावट के दौरान जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना जरूरी है। केवल शेयर की कीमत कम होने को खरीदारी का आधार नहीं बनाना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे समय में निवेशकों को कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और बुनियादी मजबूती को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।

