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BRICS से दूरी पर भड़कीं शेख हसीना, पूछा- तारिक रहमान को भारत आने से परहेज क्यों

Sheikh Hasina BRICS Statement: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल न होने के फैसले पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान की आलोचना की है। उन्होंने इस फैसले को अपरिपक्व बताते हुए कहा कि इससे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को कोई फायदा नहीं हुआ। शेख हसीना के मुताबिक, इस सम्मेलन में शामिल होकर बांग्लादेश को व्यापार, निवेश और विकास के नए अवसर मिल सकते थे, लेकिन सरकार ने यह मौका गंवा दिया। एक हालिया इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले देश के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दिल्ली में उनकी मौजूदगी की वजह से तारिक रहमान ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं हुए, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, दो देशों के रिश्ते किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी या राजनीतिक मतभेदों से प्रभावित नहीं होने चाहिए।

'BRICS में शामिल न होना निराशाजनक'

शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश का ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल न होने का फैसला निराशाजनक है। उन्होंने इसे अपरिपक्व निर्णय बताते हुए कहा कि इससे देश को कोई फायदा नहीं हुआ। हसीना के मुताबिक, ब्रिक्स केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं है। इसके जरिए व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक और विकास के क्षेत्र में सहयोग के अवसर मिल सकते हैं। उनका कहना है कि सम्मेलन में भाग लेने से बांग्लादेश को दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने और अपने आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए नए रास्ते तलाशने का मौका मिलता। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी देश के लिए नए अवसर पैदा करना है, न कि उन्हें गंवाना। शेख हसीना ने यह भी कहा कि विदेश नीति में तात्कालिक राजनीतिक फायदे के बजाय देश के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

तारिक रहमान के भारत न आने पर उठाए सवाल

शेख हसीना ने तारिक रहमान के भारत न आने के फैसले पर सवाल उठाते हुए 1979 के एक पुराने घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय बांग्लादेश के प्रधानमंत्री जियाउर रहमान भारत दौरे पर आए थे। उस दौरान शेख हसीना भी दिल्ली में रह रही थीं, लेकिन उनकी मौजूदगी से जियाउर रहमान की यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ा था। हसीना ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान और परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 3 नवंबर को ढाका सेंट्रल जेल में चार राष्ट्रीय नेताओं की भी हत्या हुई थी। उन्होंने इन घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जियाउर रहमान 1979 में दिल्ली और 1980 में लंदन गए थे, जबकि वह भी उन शहरों में मौजूद थीं। इसी उदाहरण के आधार पर शेख हसीना ने सवाल किया कि जब उनकी मौजूदगी के बावजूद जियाउर रहमान भारत आ सकते थे, तो अब उनके दिल्ली में रहने से तारिक रहमान को भारत आने में परहेज क्यों है? उन्होंने पूछा कि आखिर इस फैसले के पीछे असली वजह क्या है ।

भारत के साथ रिश्तों पर क्या बोलीं शेख हसीना

शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश को ऐसी विदेश नीति अपनानी चाहिए, जो संतुलित हो और देश के हितों को प्राथमिकता दे। उन्होंने भारत को बांग्लादेश का करीबी पड़ोसी और ऐतिहासिक साझेदार बताया। उनके मुताबिक, भारत के साथ संबंधों को किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक मतभेद के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में भागीदारी भी बांग्लादेश के लिए जरूरी है। इससे देश को व्यापार, निवेश और विकास के नए अवसर मिल सकते हैं। शेख हसीना ने ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल न होने के फैसले को बांग्लादेश के लिए गंवाया हुआ अवसर बताया। उन्होंने तारिक रहमान के भारत न आने पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेश नीति के फैसलों में व्यक्तिगत या राजनीतिक प्राथमिकताओं के बजाय राष्ट्रीय हितों को महत्व दिया जाना चाहिए।

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