Thursday, Oct 08

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शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 1.5% लुढ़का; जानें गिरावट की 5 बड़ी वजहें

Indian Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 1.5 फीसदी से अधिक गिरा। RBI की एक दिन पहले हुई रेपो रेट बढ़ोतरी और नीतिगत रुख में बदलाव के साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर रुपये ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।

दोपहर 1:31 बजे सेंसेक्स 71,605.71 पर था, जो 1,032.99 अंक यानी 1.42% नीचे था। यह 72,668 पर खुला और 71,550.76 के इंट्राडे निचले स्तर तक गया। निफ्टी 50 22,260.85 पर था, 342.20 अंक यानी 1.51% की गिरावट के साथ। निफ्टी ने 22,599.05 पर शुरुआत की और 22,228 तक फिसला।

RBI की दर बढ़ोतरी बनी सबसे बड़ी वजह

RBI ने बुधवार को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया और अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। बाजार में दर बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन नए रुख से आगे भी ब्याज दर बढ़ने की आशंका बढ़ी है। इससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव और फिक्स्ड इनकम निवेश की आकर्षकता बढ़ सकती है। वहीं, वर्ल्ड बैंक ने भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है, लेकिन बाजार में फिलहाल महंगाई, तेल और सख्त मौद्रिक नीति की चिंता ज्यादा प्रभावी है।

कच्चा तेल 104 डॉलर के करीब

Brent क्रूड 3.94% बढ़कर 104.15 डॉलर प्रति बैरल और WTI 3.89% बढ़कर 91.71 डॉलर पर पहुंच गया। भारत की बड़ी क्रूड आयात निर्भरता के कारण महंगा तेल महंगाई, आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। इससे RBI के लंबे समय तक सख्त रुख की आशंका भी बढ़ती है।

FII की लगातार बिकवाली

विदेशी निवेशकों ने बुधवार को कैश मार्केट में 6,121.37 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इससे पहले मंगलवार को 2,961.30 करोड़ और सोमवार को 4,699.14 करोड़ रुपये निकाले गए थे। 1 अक्टूबर को 9,484.22 करोड़, 30 सितंबर को 10,148.41 करोड़ और 29 सितंबर को 9,980.22 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी। यानी छह कारोबारी सत्रों में FII करीब 43,395 करोड़ रुपये बेच चुके हैं। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बुधवार को 4,596.57 करोड़ और मंगलवार को 5,088.92 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह विदेशी बिकवाली का पूरा दबाव नहीं संभाल सकी।

कमजोर रुपया भी बढ़ा रहा चिंता

रुपया करीब 96.76 प्रति डॉलर पर रहा और हाल के रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब बना हुआ है। महंगे तेल के बीच कमजोर रुपया आयातित महंगाई बढ़ा सकता है और आयातित इनपुट पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। ऊंची अमेरिकी यील्ड और विदेशी फंड आउटफ्लो भी रुपये पर दबाव डाल रहे हैं।

लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली

गिरावट व्यापक रही। निफ्टी मेटल 3.40%, ऑयल एंड गैस 2.60%, रियल्टी 2.68%, ऑटो 2.01%, फार्मा 2.26% और हेल्थकेयर 2.31% गिरे। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.33%, FMCG 2.02% और Financial Services 25/50 इंडेक्स 1.21% नीचे रहा। Financial Services Ex-Bank 1.62% और MidSmall Financial Services 1.55% गिरा। सेंसेक्स में ITC 4.09%, अडानी पोर्ट्स 3.88%, टाइटन 3.67%, पावरग्रिड 2.84%, BEL 2.68%, इंडिगो 2.62% और रिलायंस 2.56% टूटे। हालांकि TCS 1.06%, टेक महिंद्रा 0.87%, Infosys 0.77% और HCLTech 0.65% चढ़े।

GST काउंसिल की बैठक पर भी नजर

निवेशकों की नजर GST काउंसिल की बैठक पर भी है। खपत, कारोबार और सरकारी राजस्व को प्रभावित करने वाले फैसलों का असर कंपनियों की लागत और मांग पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत, FII फ्लो, रुपया, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और RBI की आगे की नीति अहम रहेगी। निफ्टी के लिए 22,200-22,000 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इंडेक्स हालिया निचले स्तरों की ओर बढ़ गया है। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब RBI की दर बढ़ोतरी और नीति बदलाव के बाद बाजार पहले से दबाव में था।

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