Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 5 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े दो अहम मामलों पर सुनवाई होगी। इन मामलों में एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि दूसरी याचिका में SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी।
Cec के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए?
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित मतभेदों और आपत्तियों का जिक्र किया गया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324(1) का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनावों की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल CEC की नहीं, बल्कि पूरे चुनाव आयोग की है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की अंतिम सुनवाई होने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कार्य करने से रोका जाए। इस अवधि में चुनाव आयोग का संचालन दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति से किए जाने की मांग की गई है।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि CEC का पद खाली होता है तो नई नियुक्ति के लिए ऐसी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हों। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
इन आरोपों और आलोचनाओं के बीच चुनाव आयोग का कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और उन्हें कानून के अनुसार वैधता प्राप्त है।
किन लोगों को बनाया गया पक्षकार?
याचिका में केंद्रीय कानून मंत्रालय के साथ चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग को पक्षकार बनाया गया है। वकील चांद कुरैशी के माध्यम से शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि CEC के स्तर पर लिए जा रहे फैसले सामूहिक निर्णय से जुड़े कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
वहीं, दूसरी याचिका में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को ही गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट आज दोनों मामलों में दलीलें सुनेगा।

