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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने के दिए निर्देश, वकीलों ने कोर्टरूम में प्रतिबंधों पर उठाए सवाल

by | Oct 11, 2026 | Breaking, Trending

Supreme Court Delhi Barricades: सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन के बीच याचिकाओं पर रविवार को सुनवाई की। जहां जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली में पुलिस द्वारा लगाए जगह-जगह बैरिकेड को हटाने और आवाजाही सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिका और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है।

'मेट्रो सामान्य समय पर चलाई जाए'

दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों को अपने पेशे से जुड़े काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल से अदालत ने कहा कि प्रतिबंधों के कारण आम लोगों के कामकाज में परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीठ ने दिल्ली मेट्रो को भी सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाने का निर्देश दिया, ताकि यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो। अदालत ने जोर दिया कि प्रतिबंधों के बीच भी लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां और पेशेवर कामकाज सामान्य रूप से जारी रह सकें।

वकीलों ने उठाए प्रतिबंधों पर सवाल

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अघोषित आपातकाल लगा रही है। उन्होंने कहा कि मेट्रो रोकने, इंटरनेट बंद करने और करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लेने से नागरिकों की आवाजाही और विरोध का अधिकार प्रभावित हो रहा है। वहीं, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए और लोगों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में लिया जा रहा है। एक अन्य वकील ने भी पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को खड़े होने तक की अनुमति नहीं थी और मामला नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा है।

क्या है मामला

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेट्रो और ट्रेनें पूरी तरह बंद नहीं की जा सकतीं और प्रतिबंध जरूरत के मुताबिक ही होने चाहिए। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन और सड़क परिवहन बाधित रहे। इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई।

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