L Murugan Resignation: केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल की चर्चाओं के बीच सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने तमिलनाडु में BJP संगठन को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर ध्यान देने की बात कही है।
'मोदी सरकार में काम करना सबसे बड़ा सम्मान'
मुरुगन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पांच वर्षों तक केंद्र सरकार में काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही। अब वह जमीनी राजनीति में लौटकर तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं।
मजदूर परिवार से केंद्रीय मंत्री बनने तक का सफर
मुरुगन ने बताया कि उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी और पशुपालन करते थे। उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जीता है। कॉलेज के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे। करीब तीन दशकों के राजनीतिक सफर में उनका सिद्धांत 'राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और स्वयं सबसे आखिर में' रहा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और BJP में जमीनी कार्यकर्ताओं को मिलने वाले अवसरों को दिया।
दो बार राज्यसभा सांसद, कई मंत्रालयों में जिम्मेदारी
मुरुगन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वह दो बार राज्यसभा सदस्य बने और पिछले पांच वर्षों में सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन तथा पशुपालन से जुड़े मंत्रालयों में जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने तमिलनाडु में चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह विस्तार, राष्ट्रीय राजमार्गों और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का उल्लेख किया। साथ ही तमिलनाडु के मुद्दों, संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों और मछुआरों के कल्याण में प्रधानमंत्री के सहयोग की सराहना की।
2029 चुनाव के लिए गांव-गांव जाने की तैयारी
मुरुगन ने कहा कि वह तमिलनाडु के हर गांव और गली में जाकर लोगों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ेंगे। उनका लक्ष्य 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का संदेश पहुंचाना, विकसित भारत में लोगों की भागीदारी बढ़ाना और 2029 में BJP को तमिलनाडु से अधिक लोकसभा सीटें दिलाना है।
उन्होंने मोदी के नेतृत्व में पार्टी को एक और कार्यकाल दिलाने में योगदान देने का संकल्प जताया। साथ ही एक मजदूर के बेटे पर जताए गए प्रधानमंत्री के भरोसे को जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। हालांकि, मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताने से यह पुष्टि नहीं होती कि उनका इस्तीफा स्वीकार हो चुका है।
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