UP Women Empowerment: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, पोषण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और अपनी आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर मां स्वस्थ और सुरक्षित हो, बेटियों को उचित पोषण और बेहतर भविष्य मिले तथा महिलाएं सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
मां महागौरी की पूजा कर दिया नारी सशक्तीकरण का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नारीशक्ति का जीवन सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से जुड़ना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में महिलाओं के स्वास्थ्य, बेटियों के पोषण और उनके बेहतर भविष्य को समाज की उन्नति से जोड़ते हुए महिला सशक्तीकरण के प्रयासों पर जोर दिया।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं
सीएम योगी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। इन समूहों के जरिए महिलाएं स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय और आय के अन्य साधनों को विकसित करने का प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाओं को अपनी मेहनत और कौशल के आधार पर नियमित आमदनी बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की खुशहाली में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
टेक होम राशन के काम में महिलाओं की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी सौंपने से उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिला है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य पोषण सेवाओं को मजबूत करना और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था में कई समस्याएं थीं। सरकार का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और पोषण संबंधी सेवाओं को बेहतर बनाने में भी मदद मिल रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में बढ़ोतरी का जिक्र
सीएम योगी ने बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इन कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण को मजबूत करना है।
दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़ीं चार लाख से अधिक महिलाएं
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के 31 जिलों में चार लाख से अधिक महिलाएं बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से महिलाएं दुग्ध उत्पादन और उससे संबंधित गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आमदनी बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के अवसर बन रहे हैं। दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर काम करने और परिवार की आय में योगदान देने का अवसर मिलता है।
बीसी सखी पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों में बीसी सखी पहल का भी उल्लेख किया। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। बीसी सखी के रूप में काम करने वाली महिलाएं ग्रामीण लोगों को बैंकिंग से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। इससे एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास होता है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं।
महिला सशक्तीकरण को विकास से जोड़ने पर जोर
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार महिलाओं को विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी पहल, दुग्ध उत्पादक कंपनियों और बीसी सखी जैसी व्यवस्थाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
आत्मनिर्भर महिलाओं से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवार की आय, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को मजबूती मिल सकती है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं सामूहिक रूप से काम करने, बचत करने और छोटे उद्यम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्र की अष्टमी पर अपने संदेश में महिला सशक्तीकरण को समाज की प्रगति से जोड़ते हुए सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। अब इन पहलों का वास्तविक प्रभाव महिलाओं की नियमित आय, रोजगार की स्थिरता और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों के विस्तार के आधार पर भी महत्वपूर्ण होगा।
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