Friday, Oct 02

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राजस्थान में तेल उत्पादन बढ़ाएगी वेदांता, पुराने तेल क्षेत्रों में 200 मिलियन डॉलर लगाएगी कंपनी

Vedanta Oil and Gas: देश में कच्चे तेल की बढ़ती जरूरत के बीच वेदांता ऑयल एंड गैस ने राजस्थान में उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है। कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में अपने पुराने तेल क्षेत्रों में करीब 200 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की तैयारी में है। इस निवेश के जरिए उत्तरी राजस्थान के मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या फील्ड में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पुराने कुओं से ज्यादा तेल निकालने पर जोर दिया जाएगा। कंपनी को पहले केयर्न इंडिया के नाम से जाना जाता था।

मंगला फील्ड में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

वेदांता की योजना में राजस्थान का मंगला फील्ड सबसे अहम है। साल 2004 में इस फील्ड की खोज के बाद बाड़मेर देश के प्रमुख ऑनशोर तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हुआ। फिलहाल यहां से करीब 80 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। कंपनी इसे बढ़ाकर 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

इसके लिए पुराने कुओं में नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें पॉलीमर फ्लडिंग जैसी तकनीक भी शामिल है, जिसका उद्देश्य जलाशय से अधिक मात्रा में तेल निकालना है।

तेल की खपत बढ़ी, उत्पादन में सीमित बढ़ोतरी

वेदांता ऑयल एंड गैस के अंतरिम सीईओ जिम जॉनी गैस्ट के मुताबिक, पुराने तेल क्षेत्रों में उत्पादन प्राकृतिक रूप से हर साल करीब 1 से 3 प्रतिशत तक घट सकता है। ऐसे में मौजूदा कुओं से अधिक रिकवरी करना कंपनी की प्रमुख प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि पिछले करीब दो दशकों में भारत का कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 0.87 से 0.99 मिलियन बैरल प्रतिदिन के दायरे में रहा है। वहीं देश में तेल की खपत 2.65 मिलियन बैरल से बढ़कर करीब 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गई है। इस बढ़ती जरूरत को देखते हुए कंपनी छोटे तेल बेसिन में भी संभावनाएं तलाश रही है।

रिकवरी रेट 60 फीसदी करने का लक्ष्य

वेदांता का कुल उत्पादन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 77.7 हजार बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले साल के 93.2 हजार बैरल प्रतिदिन की तुलना में कम है। कंपनी के कुल उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत है।

उत्पादन में गिरावट को रोकने के लिए कंपनी एल्कलाइन-सर्फेक्टेंट-पॉलीमर इंजेक्शन जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक, फिलहाल कुओं से करीब 41 प्रतिशत तक रिकवरी हो रही है और इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए पुराने तेल क्षेत्रों से उत्पादन को लंबे समय तक बनाए रखने और देश की घरेलू तेल जरूरतों को पूरा करने में योगदान देने की कोशिश की जा रही है।