केंद्र सरकार ने दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-चेन्नई समेत 7 हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है।
देश में रेल नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने देश के 7 प्रमुख हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे इन मार्गों को भविष्य की बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इन 7 प्रमुख रेल मार्गों का देश के रेलवे यातायात में बड़ा योगदान है। इन कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने के लिए कई जगहों पर चार लाइन की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
सरकार की योजना के तहत दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले सात मार्गों पर काम किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
इन मार्गों को देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्क में शामिल किया गया है। सरकार के मुताबिक, ये कॉरिडोर रेलवे के कुल यातायात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं।
दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के मजबूत होने से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच रेल संपर्क बेहतर होगा। इस मार्ग से कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर, पटना और आसनसोल जैसे प्रमुख शहर जुड़े हैं।
इससे इन शहरों के बीच यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ने की उम्मीद है।
मुंबई-हावड़ा मार्ग पश्चिमी और पूर्वी भारत के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। यह कॉरिडोर खड़गपुर, टाटानगर, बिलासपुर, रायपुर, नागपुर, भुसावल और कल्याण जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों से होकर गुजरेगा।
रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से इन क्षेत्रों के बीच माल परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
देश की दो प्रमुख आर्थिक राजधानियों दिल्ली और मुंबई को जोड़ने वाले रेल मार्ग को भी इस योजना में शामिल किया गया है। यह कॉरिडोर मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत होते हुए मुंबई तक जाएगा।
इस मार्ग के विस्तार से उत्तर और पश्चिम भारत के बीच संपर्क और मजबूत हो सकता है।
पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर भी अहम है। प्रस्तावित मार्ग मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर, छपरा, कटिहार और न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा।
इससे पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए दिल्ली-चेन्नई कॉरिडोर को भी विकसित किया जाएगा। यह मार्ग आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर, बल्लारशाह और विजयवाड़ा जैसे शहरों से होकर चेन्नई तक जाएगा।
हावड़ा-चेन्नई कॉरिडोर पूर्वी तट के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। इसके रास्ते में भुवनेश्वर, खुर्दा रोड, ब्रह्मपुर और विशाखापट्टनम जैसे महत्वपूर्ण शहर आएंगे।
वहीं मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर पश्चिमी और दक्षिण भारत के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगा। यह पुणे, कल्याण, वाडी, गुंटकल और रेणिगुंटा होते हुए चेन्नई तक जाएगा।
रेल मंत्री के अनुसार, इन सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 11 हजार किलोमीटर है। इनमें लगभग 2 हजार किलोमीटर पर चार लाइन का काम पूरा हो चुका है, जबकि करीब 5 हजार किलोमीटर पर काम चल रहा है या मंजूरी मिल चुकी है।
बाकी हिस्सों को भी अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इन व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाकर यात्री और माल परिवहन दोनों को अधिक सुगम बनाना है।
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