पश्चिम बंगाल

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का पालन, अभिषेक बनर्जी ने बिधाननगर कोर्ट में दिया वॉयस सैंपल

Abhishek Banerjee Voice Sample: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के बिधाननगर सिटी कोर्ट में उपस्थित होकर अपना वॉयस सैंपल जमा कराया। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषण से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई। अदालत के निर्देश के बाद अभिषेक बनर्जी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट पहुंचे, जहां न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार उनका वॉयस सैंपल लिया गया। इस मामले की जांच पहले से दर्ज एफआईआर के आधार पर की जा रही है।

क्या है पूरा मामला

अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ऐसा भाषण दिया था, जिसे लेकर भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच शुरू की। जांच को आगे बढ़ाने और रिकॉर्डिंग की सत्यता की पुष्टि करने के लिए अदालत से वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी गई थी।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद कोर्ट में हुए पेश

इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई तक अदालत में उपस्थित होकर वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए टीएमसी नेता निर्धारित तिथि पर बिधाननगर सिटी कोर्ट पहुंचे और कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

जांच में कैसे होगा इस्तेमाल

जांच एजेंसियां अब अभिषेक बनर्जी के वॉयस सैंपल का मिलान चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए कथित भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग से करेंगी। यदि फोरेंसिक जांच में दोनों आवाजों का मिलान होता है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। हालांकि, वॉयस सैंपल देना किसी भी आरोप को साबित या खारिज नहीं करता। यह केवल जांच प्रक्रिया का एक तकनीकी और कानूनी चरण है।

टीएमसी की ओर से क्या कहा गया

अभिषेक बनर्जी की ओर से इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने अदालत के आदेश का पालन करते हुए जांच में सहयोग किया है। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है, क्योंकि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा

वॉयस सैंपल की फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा तय होगी।

अभिषेक बनर्जी द्वारा अदालत में वॉयस सैंपल जमा कराना इस मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष फोरेंसिक जांच तथा अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा।

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Lavanya Dayal

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