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Ambala-Shamli Expressway: 4900 करोड़ से बन रहा 6-लेन एक्सप्रेसवे, 90 मिनट में पूरा होगा सफर

हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला अंबाला-शामली 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तेजी से आकार ले रहा है। करीब 4,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का लगभग 70 फीसदी निर्माण पूरा होने की जानकारी सामने आई है। योजना के मुताबिक एक्सप्रेसवे को मार्च 2027 तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद अंबाला से शामली के बीच सड़क यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। अभी जहां इस दूरी को तय करने में करीब 3 घंटे लगते हैं, वहीं नया कॉरिडोर तैयार होने के बाद सफर लगभग 90 मिनट में पूरा हो सकेगा।

121.78 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे

अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 121.78 किलोमीटर है। इसका बड़ा हिस्सा हरियाणा में और बाकी हिस्सा उत्तर प्रदेश में बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट के निर्माण की शुरुआत 2023 में हुई थी।

यह पूरा कॉरिडोर छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा। इसके निर्माण का उद्देश्य अंबाला और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधा और तेज सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।

किन जिलों से होकर गुजरेगा रूट?

नया एक्सप्रेसवे अंबाला-चंडीगढ़ रोड से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के शामली जिले में थानाभवन तक पहुंचेगा।

हरियाणा में इसका रूट अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होकर गुजरेगा। इसके बाद एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा और सहारनपुर तथा शामली को जोड़ेगा।

फिलहाल अंबाला से शामली के बीच सीधा एक्सप्रेसवे कनेक्शन नहीं होने के कारण यात्रियों को दूसरे मार्गों से होकर जाना पड़ता है। ट्रैफिक और जाम के कारण इस सफर में काफी समय लग जाता है। नए कॉरिडोर से इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा

अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे की खासियत केवल इसकी लंबाई नहीं, बल्कि दूसरे प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे के साथ इसकी कनेक्टिविटी भी है।

शामली के गोगवान जलालपुर के पास यह दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से कनेक्ट होगा। वहीं सादलपुर के पास इसे अंबाला-चंडीगढ़ और अंबाला-मोहाली मार्गों से जोड़ने की योजना है।

इस नेटवर्क से आगे अंबाला के जरिए पंजाब के लुधियाना और अमृतसर जैसे प्रमुख शहरों की ओर जाने वाले ट्रैफिक को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान को फायदा

इस एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल अंबाला और शामली तक सीमित नहीं रहने वाला है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब तथा राजस्थान से आने-जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

तेज सड़क संपर्क बनने से यात्रा का समय कम होगा और कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है।

उद्योग और किसानों के लिए भी अहम प्रोजेक्ट

अंबाला की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों, यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग और शामली-मुजफ्फरनगर क्षेत्र की चीनी मिलों के लिए यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीधा सड़क मार्ग मिलने से माल की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है। ट्रकों को लंबे और ज्यादा ट्रैफिक वाले रास्तों से बचने का विकल्प मिलेगा। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होने की संभावना है और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत भी कम हो सकती है।

एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

यात्रियों की सुविधा के लिए एक्सप्रेसवे पर आधुनिक रेस्ट एरिया विकसित किए जाने की योजना है। यहां पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, पार्किंग, स्वच्छ शौचालय और खाने-पीने की सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को ध्यान में रखते हुए चार्जिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को रास्ते में जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।

मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

करीब 4,900 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह कॉरिडोर उत्तर भारत के सड़क नेटवर्क में एक अहम कड़ी जोड़ सकता है। करीब 70 फीसदी काम पूरा होने के बाद अब परियोजना के अगले चरण पर तेजी से काम चल रहा है।

यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार निर्माण पूरा होता है, तो मार्च 2027 तक अंबाला-शामली 6-लेन एक्सप्रेसवे यातायात के लिए उपलब्ध हो सकता है। इसके शुरू होने से अंबाला और शामली के बीच सफर तेज होने के साथ-साथ आसपास के इलाकों में व्यापार और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Ayush Chaudhary

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