Saturday, Oct 24

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31 साल बाद मां की ममता ने पहचाना खोया बेटा, पिंटू से बन चुका था अब्दुल जब्बार, आंख के ऊपर निशान ने मिलाया

Bihar: बिहार के कटिहार जिले से मां-बेटे के मिलन की एक भावुक कहानी सामने आई है। यहां 31 साल पहले महज नौ साल की उम्र में परिवार से बिछड़ा बेटा आखिरकार अपने माता-पिता के पास लौट आया। इतने वर्षों में उसका नाम, पहचान और जिंदगी बदल चुकी थी, लेकिन मां ने आंख के ऊपर बचपन में लगे चोट के निशान से उसे पहचान लिया। बेटे को सामने देखकर मां मीना देवी और पिता मोतीलाल यादव भावुक हो गए।

खेलते समय ट्रेन में चढ़ा, पहुंच गया पश्चिम बंगाल

यह मामला कटिहार के मनिहारी प्रखंड स्थित कांटाकोश गांव का है। करीब 31 साल पहले मोतीलाल यादव का नौ वर्षीय बेटा पिंटू यादव दोस्तों के साथ खेलते हुए तेजनारायणपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में चढ़ गया था।

उसके दोस्त ट्रेन से उतर गए, लेकिन पिंटू अंदर ही सो गया। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी और वह परिवार से दूर पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज पहुंच गया।

अनजान जगह और भाषा की परेशानी से घबराया बच्चा रो रहा था। तभी अब्दुल रहीम नामक व्यक्ति ने उसे सहारा दिया और अपने घर ले गए। उनके परिवार ने पिंटू का अपने बच्चे की तरह पालन-पोषण किया। समय के साथ पिंटू यादव की पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई।

दिल्ली में नौकरी, शादी और तीन बच्चों का पिता बना

पालन-पोषण करने वाले परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किशोरावस्था में पिंटू को अब्दुल रहीम के बेटे के साथ काम करने दिल्ली भेज दिया गया।

बाद में उसकी शादी मुतारिना खातून से हुई और वह तीन बच्चों का पिता बन गया। हालांकि, बचपन के परिवार और गांव की धुंधली यादें उसके मन में बनी रहीं। उसने अपने माता-पिता को खोजने के कई प्रयास किए, लेकिन शुरुआत में सफलता नहीं मिली।

सोशल मीडिया की मदद से 31 साल बाद पहुंचा गांव

दिल्ली में दोस्तों ने सोशल मीडिया पर पिंटू को उसके माता-पिता और गांव से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो दिखाए। इन्हें देखकर उसकी बचपन की यादें ताजा हो गईं। इसके बाद उसने दोबारा परिवार की तलाश शुरू की और तीसरे प्रयास में अपने पैतृक गांव कांटाकोश पहुंच गया।

आंख के ऊपर पुराने निशान से मां ने पहचाना बेटा

तीन दशक बाद लौटे बेटे को माता-पिता तुरंत पहचान नहीं पाए। लेकिन मीना देवी ने जब उसकी आंख के ऊपर बचपन में लगी चोट का निशान देखा, तो उन्हें यकीन हो गया कि वह उनका खोया हुआ बेटा पिंटू है। इसके बाद मां ने बेटे को गले लगा लिया। पिता मोतीलाल यादव भी इस मुलाकात के दौरान भावुक हो गए।

बेटे की पत्नी और बच्चों को भी अपनाएगा परिवार

पिंटू के बदले हुए नाम और धार्मिक पहचान के बावजूद परिवार ने उसे खुशी से स्वीकार किया। मोतीलाल यादव ने बेटे की पत्नी और तीनों बच्चों को भी परिवार में अपनाने की इच्छा जताई। मीना देवी भी अपनी बहू और पोते-पोतियों के स्वागत के लिए तैयार हैं। बेटे की वापसी से गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने इसे इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों की मिसाल बताया।

इस मुलाकात के बाद पिंटू अपने माता-पिता और ग्रामीणों को लेकर पश्चिम बंगाल रवाना हुआ, ताकि उन्हें उस परिवार से मिलवा सके, जिसने 31 साल पहले उसे सहारा देकर पाला-पोसा था।

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