BJP Sitting CMबीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद अब पार्टी के दो सबसे अहम निकायों पार्लियामेंट्री बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति के पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि संगठन में बदलाव के अगले चरण में इन दोनों समितियों में भी नए चेहरों को जगह मिल सकती है बीजेपी का पार्लियामेंट्री बोर्ड पार्टी का सबसे बड़ा फैसला लेने वाला निकाय है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन, मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला, बड़े राजनीतिक फैसले, गठबंधन, संगठन से जुड़े अहम मुद्दे और अनुशासनात्मक मामलों पर अंतिम निर्णय यही बोर्ड करता है। इसलिए इसे बीजेपी का सबसे शक्तिशाली संगठनात्मक मंच माना जाता है।
बोर्ड में कितने सदस्य होते हैं?
बीजेपी के संविधान के मुताबिक पार्लियामेंट्री बोर्ड में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते हैं। उनके अलावा अधिकतम 10 अन्य सदस्य हो सकते हैं। संगठन महामंत्री बोर्ड के सचिव की जिम्मेदारी निभाते हैं। अभी सचिव बी एल संतोष है। फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत बोर्ड में कुल 12 सदस्य हैं।
सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई तय फॉर्मूला नहीं है। पार्टी वरिष्ठता, संगठन में अनुभव, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व, सामाजिक और जातीय संतुलन, महिलाओं, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की भागीदारी जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखती है। आमतौर पर वरिष्ठ नेता, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और संगठन के अनुभवी नेताओं को इसमें जगह मिलती है।
क्या मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं सदस्य?
बीजेपी में आमतौर पर सिटिंग मुख्यमंत्रियों को पार्लियामेंट्री बोर्ड में शामिल नहीं किया जाता। सूत्र बताते है कि यही बोर्ड मुख्यमंत्री चुनने का फैसला करता है, इसलिए हितों के टकराव से बचने की कोशिश रहती है। हालांकि, यह कोई लिखित नियम नहीं है और पार्टी जरूरत पड़ने पर इससे अलग फैसला भी ले चुकी है।
पहले भी बन चुके हैं सिटिंग मुख्यमंत्री सदस्य
इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें पार्लियामेंट्री बोर्ड में शामिल किया गया था। 2006 में उनका नाम बोर्ड से हटाया गया, लेकिन 2013 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें फिर बोर्ड में जगह मिली। 2014 में प्रधानमंत्री बनने तक वे इसके सदस्य रहे। दूसरा बड़ा उदाहरण शिवराज सिंह चौहान का है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए वे 2013-14 में संसदीय बोर्ड में शामिल हुए और 2022 तक सदस्य रहे। उस समय वे पार्टी के एकमात्र सिटिंग मुख्यमंत्री थे जो संसदीय बोर्ड का हिस्सा थे।
इस बार किन नामों की चर्चा?
नई राष्ट्रीय टीम बनने के बाद अब कई नए नाम चर्चा में हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है। इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का नाम भी सामने आ रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम भी चर्चा में है। वे पहले से केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं और माना जा रहा है कि उन्हें संसदीय बोर्ड में भी जगह मिल सकती है।
क्या है केंद्रीय चुनाव समिति (CEC)?
पार्लियामेंट्री बोर्ड के बाद बीजेपी की सबसे अहम समिति केंद्रीय चुनाव समिति है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में किसे टिकट मिलेगा, इसका अंतिम फैसला यही समिति करती है। इस समिति में संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य शामिल होते हैं। इनके अलावा कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी सदस्य बनाया जाता है। फिलहाल इसमें करीब 15 सदस्य हैं।
CEC में भी बदलाव संभव
नई राष्ट्रीय टीम बनने के बाद केंद्रीय चुनाव समिति में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। महिला मोर्चा की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य नए चेहरों को भी जगह मिलने की चर्चा है।
अब सबकी नजर अगले ऐलान पर
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब पार्टी के अगले बड़े फैसले का इंतजार है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में बदलाव के जरिए पार्टी 2027 और 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नया स्वरूप दे सकती है।
रिपोर्ट/पंकज वानखेड़े

