Iran-America Tension:
Iran-America Tension: ईरान की राजधानी तेहरान से एक बेहद सनसनीखेज और तनाव बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आवास और मुख्यालय के नजदीक सोमवार रात भीषण झड़प हुई, जिसने पूरे सुरक्षा तंत्र को हिला कर रख दिया। ईरान के विपक्षी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (MEK) ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने खामेनेई के निवास के पास एक बड़ा ऑपरेशन अंजाम दिया। संगठन का कहना है कि इस कार्रवाई में कई वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारे गए, हालांकि इस दौरान उसके भी करीब 100 लड़ाके मारे गए या पकड़े गए।
ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने MEK के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा बलों ने समय रहते साजिश को नाकाम कर दिया और 100 से अधिक MEK लड़ाकों को मार गिराया।
यह टकराव तेहरान के अत्यधिक सुरक्षित मोताहारी कॉम्प्लेक्स के आसपास हुआ। यह वही परिसर है, जहां खामेनेई का हेडक्वार्टर, गार्डियन काउंसिल, एक्सपर्ट्स असेंबली, इंटेलिजेंस मंत्रालय, न्यायपालिका का केंद्रीय कार्यालय, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और खामेनेई के बेटे मोजतबा का निवास व कार्यालय स्थित है।
MEK का दावा है कि झड़पें सुबह की नमाज के समय शुरू हुईं और कई घंटों तक चलीं। संगठन के अनुसार, संघर्ष के बाद पूरे दिन परिसर में एंबुलेंस की आवाजाही देखी गई।
ईरान की न्यूज एजेंसी और हिज़्बुल्लाह से अखबार ने भी झड़प और भारी हताहतों की पुष्टि की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में द जेरुशलम पोस्ट ने इस संघर्ष को ईरान के अंदरूनी हालात के लिए गंभीर संकेत बताया है।
अल-अखबार की रिपोर्ट में इस ऑपरेशन को MEK द्वारा किया गया अब तक का सबसे “खतरनाक और जटिल” मिशन बताया गया है। MEK ने दावा किया कि इस कार्रवाई को विदेशी खुफिया एजेंसियों का समर्थन मिला था, हालांकि इसका कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है।
MEK ने कहा है कि झड़पों के दौरान हिरासत में लिए गए उसके 16 सदस्यों के नाम उसने संयुक्त राष्ट्र के विशेष रिपोर्टर को सौंप दिए हैं और बाकी लापता व घायल सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जहां MEK इस ऑपरेशन को आंशिक रूप से सफल बता रहा है, वहीं ईरानी सरकार इसे पूरी तरह नाकाम कार्रवाई करार दे रही है। ईरान की सत्ता MEK को अब भी एक आतंकी संगठन मानती है, जबकि MEK खुद को सरकार के खिलाफ “प्रतिरोध आंदोलन” बताता है।
तेहरान में हुई यह झड़प न सिर्फ ईरान की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकती है।
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