Lula Victory: ब्राजील में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर चौथे कार्यकाल का रास्ता साफ कर लिया है। दूसरे चरण के मतदान में उन्हें 51.8 फीसदी वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 फीसदी मत हासिल हुए। दोनों के बीच करीब 44 लाख वोटों का अंतर रहा। लूला की इस जीत का असर सिर्फ ब्राजील की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों और BRICS में सहयोग के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
लूला की जीत के बाद ब्राजील की राजनीति में क्या हुआ?
रविवार, 25 अक्टूबर को हुए मतदान में जीत के बाद लूला ने लंबे समय से उनका समर्थन करने वाले ब्राजील के लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी का पिछवाड़ा बनकर नहीं रहेगा। दूसरी ओर, फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों को 'समझ से परे' बताया और वोट रद्द कराने की कोशिश करने की बात कही। 26 अक्टूबर तक उन्होंने अपनी हार स्वीकार नहीं की थी। चुनाव में ब्राजील के 27 राज्यों में से 13 में लूला और 14 में बोल्सोनारो को जीत मिली, लेकिन कुल मतों में लूला आगे रहे।
भारत के लिए क्यों अहम है लूला की वापसी
भारत और ब्राजील BRICS के शुरुआती सदस्य देशों में शामिल हैं। इस समूह में अब 11 देश हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, क्रय शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर BRICS देशों की अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 40 फीसदी है। IMF के अनुमानों के अनुसार, 2031 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 43.1 फीसदी हो सकती है, जबकि G7 की हिस्सेदारी 25.8 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि, सामान्य अमेरिकी डॉलर के आधार पर अर्थव्यवस्था का आकार मापने पर G7 अब भी बड़ा है। लूला की विदेश नीति में अमेरिका और चीन जैसी बड़ी ताकतों के साथ संबंध बनाए रखने पर जोर रहा है। भारत भी दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन साधने की कोशिश करता है। ऐसे में लूला की वापसी BRICS के भीतर भारत और ब्राजील के सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकती है।
BRICS में भारत-ब्राजील के सहयोग की संभावना
भारत ने इस साल BRICS की अगुवाई की थी। 12 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS नेताओं की बैठक हुई थी। लूला इस बैठक में शामिल नहीं हुए और उन्होंने अपनी जगह विदेश मंत्री को भेजा था। उस समय ब्राजील में चुनाव प्रचार चल रहा था। अब चुनाव के बाद दोनों देशों के बीच BRICS के मंच पर सहयोग बढ़ाने और साझा मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने का अवसर है।
भारत-ब्राजील के बीच 15.1 अरब डॉलर का व्यापार
भारत और ब्राजील के रिश्तों में व्यापार एक महत्वपूर्ण पहलू है। वाणिज्य मंत्रालय के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट डेटा बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 15.1 अरब डॉलर रहा। यह 2010-11 के मुकाबले करीब दोगुना है।
लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में ब्राजील भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, मौजूदा व्यापार संतुलन ब्राजील के पक्ष में है।
भारत का निर्यात: 7 अरब डॉलर
भारत का आयात: 8.1 अरब डॉलर
भारत का व्यापार घाटा: करीब 1 अरब डॉलर
एक साल में ब्राजील से भारत का आयात करीब आधा बढ़ा। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में इस बढ़ोतरी की वजह बनने वाली वस्तुओं का विवरण नहीं दिया गया है।
पांच साल में 20 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लूला ने दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले पांच साल में 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस पर सहमति जताई थी। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार में हर साल करीब 5.8 से 7.3 फीसदी की वृद्धि जरूरी होगी। पिछले 15 वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार औसतन 4.7 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है। ऐसे में 20 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यापार की रफ्तार बढ़ानी होगी।
चुनाव में ब्राजील दो हिस्सों में बंटा नजर आया
चुनाव के नतीजों में क्षेत्रीय मतभेद भी साफ दिखाई दिए। पूर्वोत्तर ब्राजील में लूला को दो-तिहाई से अधिक मतदाताओं का समर्थन मिला, जबकि दक्षिण में बोल्सोनारो को मजबूत समर्थन हासिल हुआ। उत्तर क्षेत्र में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां लूला केवल 1,079 वोटों से आगे रहे। पूर्वोत्तर में उन्हें बोल्सोनारो के मुकाबले 1.37 करोड़ अधिक वोट मिले। इसी बड़े अंतर ने देशभर में उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई।
लूला के सामने आगे की चुनौतियां
चुनाव जीतने के बावजूद ब्राजील की राजनीति में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बोल्सोनारो ने नतीजों को चुनौती देने की बात कही है। मतदान के दिन भी अव्यवस्था की खबरें आईं। दोनों पक्षों ने मतदान के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाया, लेकिन कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनें पहले ही बंद हो चुकी थीं। भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि लूला के नए कार्यकाल में द्विपक्षीय व्यापार को कितनी तेजी से बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, BRICS के भीतर दोनों देश किस तरह अपना सहयोग मजबूत करते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।
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