HQ-9B missile failure: चीन युद्ध में सीधे शामिल नहीं है, लेकिन उसके प्रमुख सैन्य निर्यातों की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में है। बीजिंग की प्रमुख वायु रक्षा प्रणाली HQ-9B हाल के सालों में लगातार दो बार महत्वपूर्ण संघर्षों में फेल साबित हुआ है। ताजा घटना ईरान में हुई, जहां अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों के दौरान यह प्रणाली अपने दायित्वों में पूरी तरह असमर्थ साबित हुई।
ईरान ने जुलाई 2025 में चीन के साथ तेल के बदले हथियार सौदे के तहत HQ-9B मिसाइल प्रणाली हासिल की थी। यह प्रणाली अमेरिकी और इज़राइली हवाई हमलों के खिलाफ ईरान के महत्वपूर्ण स्थलों की रक्षा के लिए तैनात की गई थी। हालांकि 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों में यह प्रणाली पूरी तरह विफल रही। विशेष रूप से नतान्ज़ और फोर्डो में स्थित परमाणु अवसंरचनाओं के आसपास तैनात मिसाइलें आने वाली मिसाइलों को रोकने में असमर्थ रहीं। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस हमले के बाद नतान्ज़ परमाणु स्थल पर क्षति की पुष्टि की, लेकिन विकिरण रिसाव की कोई घटना नहीं बताई।
हालिया अमेरिकी-इजरायली हमलों ने ईरान के 20 से अधिक प्रांतों में भारी तबाही मचाई। इस हमले में 550 से अधिक नागरिकों की मौत हुई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। HQ-9B की असफलता ने ईरान के वायु रक्षा नेटवर्क की कमजोरियों को उजागर कर दिया।
HQ-9B की यह दूसरी प्रमुख विफलता है। मई 2025 में कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तैनात यह प्रणाली भारतीय हमलों के सामने फेल हुआ था। पाकिस्तानी हवाई अड्डों और शहरों की सुरक्षा के लिए तैनात मिसाइलें भारतीय हारोप ड्रोन सहित हमलों को रोकने में असफल रहीं। रक्षा विश्लेषक टॉम कूपर ने उस समय कहा था कि "कराची में पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली धीरे-धीरे ध्वस्त हो गई।
HQ-9B चीन की एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित प्रणाली है और रूस के एस-300 पीएमयू तथा अमेरिका के पैट्रियट पीएसी-2 से प्रेरित है। इसकी मारक क्षमता 260 किलोमीटर है और यह 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को भेद सकती है। सक्रिय रडार होमिंग और इन्फ्रारेड सीकर की मदद से यह प्रणाली एक साथ 100 खतरों को ट्रैक कर सकती है और छह से आठ को निशाना बना सकती है।
ईरान ने HQ-9B में स्थानीय प्रणालियों जैसे बावर-373, खोरदाद-15 और पैंटसिर-एस1 को भी शामिल किया, ताकि रूसी एस-300 पीएमयू2 की कमियों को दूर किया जा सके। लेकिन अमेरिकी और इज़राइली जेट विमानों के हमलों के सामने यह मिश्रण नाकाम रहा।
रूसी रक्षा विशेषज्ञ विक्टर क्वर्ट ने कहा, "चीन द्वारा ईरान को आपूर्ति की गई तीन HQ-9B प्रणालियाँ अमेरिकी हमलों के शुरुआती घंटों में नष्ट हो गईं। पाकिस्तान और वेनेजुएला के बाद अब ईरान में भी चीनी हथियार विफल हो रहे हैं।" कई विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि क्या HQ-9B में कोई तकनीकी खामी है या यह उच्च तकनीक वाले हमलों के सामने टिक नहीं पाई।
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