विकसित भारत जी राम जी बिल
संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में सरकार ने मनरेगा बिल को बदलकर “विकसित भारत जी राम जी बिल” पेश किया, जिसे कांग्रेस ने स्वीकार करने से इनकार करते हुए मजदूर-विरोधी करार दिया। अब इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 2026 में इसे पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी की है।
कांग्रेस की सबसे बड़ी इकाई यानी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस ने मनरेगा को इस साल का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने का प्लान तैयार किया | 2025 में SIR मुद्दे से मिली विफलता के बाद पार्टी ने मनरेगा के ज़रिए सरकार और ख़ुद की पकड़ को मज़बूत करने की रणनीति को तैयार किया है।
कांग्रेस ने पूरे साल देश भर में मनरेगा के ज़रिए ग्रामीण इलाकों और गांवों में अपनी पकड़ व ज़मीनी आधार को फिर से मज़बूत करने के लिए पंचायत से लेकर ज़िला और ज़िलों से लेकर प्रदेश स्तर तक कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पार्टी नेताओं के माध्यम से हर राज्य में मनरेगा के समर्थन में अभियान, प्रदर्शन और पंचायती चौपाल आयोजित की गई हैं, जिनमें ख़ुद राहुल गांधी भी शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस कल दिल्ली में भी मनरेगा अभियान कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है, जिसमें देश भर से 25–30 सिविल सोसाइटी संगठनों और NGO के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल होंगे।
पार्टी पिछले कई वर्षों से अलग-अलग मुद्दों के ज़रिए ज़मीनी पकड़ मज़बूत करने और बीजेपी को हराने के लिए नए-नए मुद्दे जनता के बीच उठाती रही है, लेकिन चुनाव दर चुनाव कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। 2024 के चुनाव में पार्टी ने संविधान का मुद्दा उठाया और इसे लोकसभा चुनाव का प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश की। एक हद तक इस मुद्दे के ज़रिए कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिला, लेकिन सत्ता की कुर्सी फिर भी नहीं मिल पाई और बीजेपी ने एक बार फिर सरकार बना ली।
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी ने वोट चोरी और SIR का मुद्दा तलाशा और इसे पुरज़ोर तरीके से उठाया। राहुल गांधी ने कई प्रेस कॉन्फ़्रेंस कीं और कई खुलासे किए, बल्कि बिहार में वोटर अधिकार यात्रा तक निकाली, लेकिन चुनावी नतीजे इसके उलट देखने को मिले। वोट चोरी के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने चर्चाओं में ख़ुद को और इस विवाद को शामिल तो किया, लेकिन नतीजों पर इसका कोई असर नहीं दिखा।
अब कांग्रेस पार्टी एक नए मुद्दे के साथ केंद्र सरकार से लड़ती नज़र आ रही है। जहां एक ओर बीजेपी VK-G-R-G बिल के लाभों का प्रचार कर रही है, वहीं कांग्रेस पुराने मनरेगा बिल के फायदों को गिनाते हुए नए बिल को मज़दूर-विरोधी बताकर सरकार को घेरने में जुटी हुई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस को लगता है कि मनरेगा बिल के ज़रिए वह सरकार को घेरने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में अपनी खोई हुई छवि और ज़मीनी आधार को फिर से स्थापित कर सकती है। उच्च सूत्रों के अनुसार, मनरेगा के माध्यम से कांग्रेस ग्राम पंचायतों से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है।
पार्टी का मानना है कि बदले हुए नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाकर वह बीजेपी को घेरने के साथ-साथ उसके भीतर भी फूट डालने का प्रयास कर सकती है। इसी रणनीति के तहत राहुल गांधी अलग-अलग राज्यों—चाहे केरल हो या उनका संसदीय क्षेत्र रायबरेली—में जाकर मनरेगा चौपाल करते नज़र आ रहे हैं। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि यह रणनीति आने वाले दिनों में कितनी कारगर साबित होती है।
-कनिका कटियार, नई दिल्ली
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