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भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट, जन्मदर रिप्लेसमेंट स्तर से भी नीचे

Hum Do Humare Do : भारत में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब ‘हम दो, हमारे दो’ की सोच से भी धीमी हो गई है। विश्व बैंक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देश में औसत जन्मदर (Fertility Rate) 1.98 पर आ गई है, जबकि किसी भी आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए यह दर 2.1 होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जन्मदर में आई यह गिरावट शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का परिणाम है। साथ ही, परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।

क्यों घटने लगी है जन्म दर

शहरी जीवन में मेडिकल, एजुकेशन, लाइफस्टाइल के खर्चे बढ़ गए है, जिसके चलते लोग अपनी जीवन शैली नहीं करना चाहते जिसके कारण आबादी को सीमित ही रख रहे है। वहीं जपान का यह हाल है कि वहां 16वें साल में कमी आई है। इसका अर्थ है कि मृत्यु के नंबर जन्म से अधिक हो गया है। कम बच्चे पैदा हो रहे है और इसका सीधा असर आबादी में कमी के तौर पर दिख रहा है। जानकार का मानना है कि कृषि व्यवस्था से दुनिया का औघैगिकीकरण की ओर से मुड़ना भी इसका कारण है।

घटती जन्मदर को लेकर क्या है विशेषज्ञों की राय?

जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार, 2.1 से कम जन्मदर का मतलब है कि आने वाले दशकों में भारत की आबादी में तेज़ी से बढ़ोतरी नहीं होगी और भविष्य में यह स्थिर या घट भी सकती है। इससे रोजगार, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर दूरगामी असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ राज्यों में यह दर अब भी 2.1 से अधिक है, लेकिन ज्यादातर राज्यों में यह रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अब नीतियां बनाते समय जनसंख्या घटने के दीर्घकालिक प्रभावों पर भी ध्यान देना होगा।

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जन्मदर कम होने के कुछ फायदे भी है

समाज में जन्मदर कम होने की एक वजह महिलाओं की आजादी भी है। जो बीते कुछ समय में बढ गई है। संतान उत्पत्ति रे लेकर वे अब खुद निर्णय ले रही है। इसके अलावा एक फायदा यह है कि आबादी कम होने के चलते पैदा होने वाले बच्चों के जीवनशौली में सुधार हो सकता हैं। इलके कारण से भी कुछ लोग कम बच्चे ही पैदा करना चाहते है।

Jyoti Karki

ज्योति कार्की एक युवा पत्रकार हैं जो स्वास्थ्य, महिला और बाल कल्याण की खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने मीडिया जगत में अपना कदम रखा है। ज्योति ने हिंदुस्तान, एनडीटीवी और इंडिया टीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से इंटर्नशिप की है। इसके अतिरिक्त, नोएडा में लोकल रिपोर्टिंग का अनुभव प्राप्त करके उन्होंने जमीनी स्तर की पत्रकारिता की बारीकियों को समझा है।वर्तमान में ज्योति न्यूज इंडिया के साथ रिपोर्टर और कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा के प्रति उनका जुनून निरंतर बना रहता है और वे डेवलपमेंट जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। ज्योति डिजिटल मीडिया में भी सक्रिय हैं। वे पॉडकास्ट और वीडियो इंटरव्यू का निर्माण भी करती हैं।

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