Dinesh Arya Rajya Sabha: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक दांव चला है। पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए नैनीताल के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार बनाया है। दिनेश आर्य दलित समाज से आते हैं और लंबे समय से बीजेपी संगठन से जुड़े रहे हैं। उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय में सामने आई है, जब हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धीकरण विवाद’ को लेकर सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को दलित सम्मान से जोड़ा था। अब बीजेपी के इस फैसले को कांग्रेस के दलित मुद्दे को जवाब देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
खड़गे की रैली के बाद गरमाया विवाद
मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके बाद मैदान के कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर विवाद शुरू हुआ। कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान से जोड़कर बीजेपी पर सवाल उठाए। हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। विवाद के बाद बीजेपी ने इलाके में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई। पार्टी नेताओं के दौरे हुए और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दलित परिवार के घर पहुंचने को भी इसी राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा गया। अब दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
दिनेश आर्य का RSS और बीजेपी से पुराना रिश्ता
दिनेश आर्य लंबे समय से संघ और बीजेपी से जुड़े हुए हैं। उनका परिवार भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा रहा है। उनके पिता बची राम आर्य हल्द्वानी नगर पालिका में सभासद और नगर महामंत्री रह चुके हैं। दिनेश आर्य ने 1998 में संघ शिक्षा वर्ग का तृतीय वर्ष पूरा किया था। इसके बाद बीजेपी संगठन में उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं। 2007 में उन्हें नैनीताल जिले का बीजेपी जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसके अलावा वह बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री, प्रदेश महामंत्री और प्रदेश मंत्री भी रह चुके हैं।
2027 से पहले दलित वोटों पर नजर
उत्तराखंड में दलित मतदाताओं की संख्या अहम मानी जाती है। राज्य की 70 विधानसभा सीटों में 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दिनेश आर्य को राज्यसभा भेजने का फैसला राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। पार्टी के इस कदम को दलित समाज के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। दिनेश आर्य की उम्मीदवारी से बीजेपी को एक ऐसा चेहरा मिला है, जिसकी पहचान संगठन के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता के तौर पर रही है।
कांग्रेस के दलित कार्ड का जवाब
खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद कांग्रेस ने जिस तरह दलित सम्मान का मुद्दा उठाया, उसके बाद बीजेपी की ओर से दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाना चर्चा का विषय बन गया है।
राज्य बनने के बाद बीजेपी की ओर से दिनेश आर्य का चयन उत्तराखंड के एक प्रमुख दलित चेहरे के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रदीप टम्टा जैसे दलित नेता पहले राज्यसभा पहुंच चुके हैं। अब सवाल यह है कि दिनेश आर्य की उम्मीदवारी से बीजेपी अपने दलित समीकरण को कितना मजबूत कर पाती है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में दलित वोटों को लेकर दोनों प्रमुख दलों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
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