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आंसू गैस के गोलों ने कैसे बचाई फ्रांस के राष्ट्रपति की कुर्सी? एलिसी पैलेस से 300 मीटर दूर तक पहुंच गए थे प्रदर्शनकारी

by | Oct 19, 2026 | Cover Story Global

France Protest: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन रविवार, 18 अक्टूबर को हिंसक हो गया। हजारों प्रदर्शनकारी राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस के करीब पहुंच गए। राष्ट्रपति भवन से करीब 300 मीटर दूर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने की कार्रवाई की गई। घटना के बाद फ्रांस में कानून-व्यवस्था और सरकार की स्थिति को लेकर बहस तेज हो गई है।

एलिसी पैलेस के करीब कैसे पहुंची भीड़

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रपति आवास की ओर बढ़ने लगे। सुरक्षा के लिए वहां बैरिकेड लगाए गए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। फ्रांस के गृह मंत्री के मुताबिक, हालात ऐसे हो गए थे कि पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। पुलिस बल की तुलना में प्रदर्शनकारियों की संख्या अधिक होने के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने में चुनौतियां सामने आईं।

आंसू गैस के इस्तेमाल से कैसे बदले हालात

एलिसी पैलेस के पास स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। ले मोंद की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर होने लगे। इसके तुरंत बाद दंगा नियंत्रण बल को तैनात किया गया और राष्ट्रपति आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन से दूर रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई। हालांकि, घटना के बाद सरकार और पुलिस की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे।

गृह मंत्री ने इस्तीफे की पेशकश की

घटना के बाद फ्रांस के गृह मंत्री ने सोमवार, 19 अक्टूबर को स्वीकार किया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण खो बैठी थी। उन्होंने इस्तीफे की पेशकश भी की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। मैक्रों ने पुलिस व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। इस घटनाक्रम ने फ्रांस में कानून-व्यवस्था संभालने की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों को बताया लुटेरा

घटना के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने एक वीडियो जारी कर प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गणतंत्र को लूटने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदर्शन के दौरान दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। फ्रांस 24 के मुताबिक, 1,500 से अधिक दुकानों पर हमले हुए और कई जगह लूटपाट की घटनाएं दर्ज की गईं। सरकार ने नुकसान का आकलन करने की बात कही है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्यों नाराज हैं लोग?

फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ हुई थी। वामपंथी दलों से जुड़े छात्रों ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और जरूरत से ज्यादा भरी कक्षाओं का मुद्दा उठाया। सरकार के मुताबिक, देश में औसतन 24 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। छात्रों का विरोध धीरे-धीरे व्यापक प्रदर्शन में बदल गया। इसके बाद हुई हिंसा ने शिक्षा सुधार की मांग के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।

क्या इस घटना से मैक्रों सरकार पर बढ़ेगा दबाव

एलिसी पैलेस के करीब प्रदर्शनकारियों का पहुंचना फ्रांस की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। गृह मंत्री की ओर से पुलिस की नाकामी स्वीकार करना और इस्तीफे की पेशकश करना भी इस घटना की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, इस घटनाक्रम के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि मैक्रों की सत्ता पर तत्काल खतरा पैदा हो गया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रही मांगों का समाधान कैसे करती है और भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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