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टाइपो से लेकर ट्रंप द्वारा उन्हें दरकिनार किए जाने तक…गाजा शांति बोर्ड की मीटिंग में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की हुई बेइज्जती

Shahbaz Sharif insult: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पहले 'शांति का दूत' और 'दक्षिण एशिया का रक्षक' बताया. फिर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया। इसके बावजूद गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति बोर्ड की पहली बैठक में शरीफ को हाशिए पर रखा गया और कार्यक्रम में उनका अलग-थलग दिखाया गया। इस शिखर सम्मेलन में 40 देशों की भागीदारी थी, लेकिन पाकिस्तान को केवल शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जबकि भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया।

अमेरिका में हुई गलती और आलोचना

शरीफ की अमेरिकी यात्रा की शुरुआत ही विवादों से हुई। विदेश मंत्रालय के बयान में कई वर्तनी संबंधी गलतियां थीं, जैसे 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका' की गलत स्पेलिंग। यह गलती सोशल मीडिया पर वायरल हुई और पाकिस्तानियों के बीच भी मजाक का विषय बनी।

फोटो सेशन में असहज स्थिति

शिखर सम्मेलन में समूह तस्वीर के दौरान 5.5 फीट लंबे शरीफ को किनारे कर दिया गया। ट्रंप के सामने सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर के नेता प्रमुखता से खड़े थे, जबकि शरीफ पीछे रह गए। बाद में भाषण के दौरान ट्रंप ने शरीफ की ओर इशारा कर उन्हें खड़े होने के लिए कहा, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया गया।

पाकिस्तान ने ट्रंप की तारीफ में बांधे तारीफों के पुल

शरीफ ने ट्रंप की तारीफ करते हुए पिछले वर्ष भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में उनके हस्तक्षेप की सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने समयोचित और प्रभावी कदम उठाकर लाखों जानें बचाई। हालांकि, भारत लगातार यह बताता रहा कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधे हुआ था।

गले मिलने की असहज स्थिति

शिखर सम्मेलन के समापन पर शहबाज शरीफ ने ट्रंप को गले लगाने का प्रयास किया, लेकिन यह असहज दिखा। ट्रंप ने बाद में शरीफ को अपनी ओर खींचकर गले लगाया और उन्हें थोड़ी राहत मिली। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भी प्रशंसा की।

गाजा में पाकिस्तान की भूमिका

गाजा में स्थिरता बल भेजने को लेकर पाकिस्तान ने हिचकिचाहट दिखाई। ट्रंप ने अन्य देशों के सेना भेजने की पुष्टि की, लेकिन पाकिस्तान का उल्लेख नहीं किया। यह स्थिति राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि पाकिस्तान इजराइल को मान्यता नहीं देता और देश में इस कदम को लेकर विरोध की संभावना है।

पाकिस्तानी नीतियों पर अमेरिकी प्रभाव

शरीफ की यात्रा ने स्पष्ट किया कि ट्रंप की अतिशयोक्ति और तारीफ पाकिस्तान को अमेरिकी समर्थन दिलाने में मदद नहीं करती। गाजा में ठोस प्रतिबद्धता न दिखाने और राजनीतिक जोखिम के कारण इस कार्यक्रम में पाकिस्तान का प्रभाव सीमित रहा, जबकि शहबाज शरीफ की कोशिशें असफल साबित हुईं।

Yas Pal

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