Global Food Crisis: दुनिया के सामने खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे वैश्विक खाद्य संकट की स्थिति बन सकती है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रूट में किसी भी तरह की बाधा के असर को लेकर चेतावनी दी। म्यूनिख लीडर्स बैठक में वित्त मंत्री ने कई अहम मुद्दों पर बात की। इनमें वैश्विक खाद्य सुरक्षा, समुद्री मार्गों में व्यवधान और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब को लेकर चिंता
निर्मला सीतारमण ने होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों में व्यवधान को वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने मलक्का जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। वित्त मंत्री के मुताबिक, फिलहाल मलक्का स्ट्रेट में कोई समस्या नहीं है, लेकिन वहां किसी भी तरह का व्यवधान मौजूदा स्थिति को और गंभीर बना सकता है। इन समुद्री मार्गों से होने वाली आवाजाही में रुकावट का असर जरूरी वस्तुओं और उर्वरकों की आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में इसका सीधा प्रभाव खाद्य सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है।
भारत ने उठाए कई कदम
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है। उर्वरक लेकर आने वाली शिपिंग लाइनों को बढ़ते बीमा प्रीमियम और भुगतान से जुड़ी दिक्कतों में मदद देने के लिए भारत ने शिपिंग आपातकालीन कोष बनाया है। उन्होंने कहा कि ऊंची कीमतें, सीमित शिपिंग उपलब्धता और भारी बीमा प्रीमियम उर्वरक आयात के रास्ते में बड़ी बाधाएं बन रहे हैं। इससे निपटने के लिए भारत घरेलू स्तर पर यूरिया और फॉस्फेट का उत्पादन बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी बात
म्यूनिख बैठक में निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी बातचीत में एक स्थिर स्थिति पर पहुंच गए हैं और इस स्तर पर किसी भी पक्ष के लिए ज्यादा देना या ज्यादा लेना मुश्किल होगा।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका मौजूदा बातचीत से अलग उपायों के जरिए भारत के साथ अपने व्यापार असंतुलन को कम करने की कोशिश कर रहा है। भारत और अमेरिका फरवरी 2025 से व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
ये भी पढ़ें: इमारतों से विमान टकराना चाहता था को-पायलट, तेल अवीव को लेकर रिपोर्ट में बड़ा दावा

