Gyanodaya Conclave
Gyanodaya Conclave : न्यूज़ इंडिया 24×7 द्वारा आयोजित ‘ज्ञानोदय’ कॉन्क्लेव में राजस्थान के शिक्षा वित्त मेघेंद्र ने कहा कि नई शिक्षा नीति के बारे में मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि यह नीति समग्र (होलिस्टिक) विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज के समय में मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच की आवश्यकता है, और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत की नई शिक्षा नीति तैयार की गई है। इसके कई पैरामीटर्स शिक्षा की प्रासंगिकता को दर्शाते हैं। यदि हम शिक्षा की एक्सेस, प्रासंगिकता और गुणवत्ता इन तीनों पहलुओं पर ध्यान देना चाहते हैं, तो नई शिक्षा नीति एक सशक्त माध्यम के रूप में सामने आती है।
मेघेंद्र जी ने आगे कहा नई शिक्षा नीति में यह भी स्वीकार किया गया है कि वर्तमान समय में हमें कई तरह के संकटों का सामना करना पड़ रहा है। कोविड काल के दौरान जब पूरी शिक्षा व्यवस्था ऑनलाइन हो गई, तो शिक्षण प्रक्रिया में एक बड़ा अंतराल उत्पन्न हुआ। हम बच्चों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देना चाहते थे, लेकिन ऑनलाइन माध्यम के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, कि नई शिक्षा नीति इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें प्रारंभिक बाल शिक्षा, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा को मूल रूप से सम्मिलित किया गया है। इस नीति में 5+3+3+4 का नया ढाँचा प्रस्तुत किया गया है अर्थात् पांच वर्ष की बुनियादी शिक्षा से शुरुआत होती है, जिसके बाद तीन-तीन वर्ष के दो चरण और अंत में चार वर्ष की उच्च माध्यमिक शिक्षा आती है।
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