Wednesday, Aug 19

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घोड़े की नाल लगाते समय खुर पर क्यों लगाते हैं गर्म लोहा? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

Horse Shoeing Process: आपने अक्सर घोड़ों के पैरों में लोहे की नाल लगी देखी होगी, लेकिन क्या कभी सोचा है कि इसे लगाया कैसे जाता है? क्या नाल लगाने से पहले घोड़े के खुर को सच में गर्म लोहे से जलाया जाता है? यह सवाल सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है, लेकिन नाल लगाने की प्रक्रिया इसके पीछे एक अलग वैज्ञानिक वजह है। खास तौर पर हॉट शूइंग में गर्म नाल को खुर से हल्के समय के लिए संपर्क कराया जाता है।

घोड़े को नाल पहनाने की जरूरत क्यों पड़ती है

घोड़ों के खुर लगातार जमीन के संपर्क में रहते हैं। घोड़े की गतिविधि, काम का बोझ, जमीन की सतह और खुरों की स्थिति के आधार पर उन्हें नाल की जरूरत पड़ सकती है। नाल खुरों को अत्यधिक घिसने, टूटने और दरार पड़ने से बचाने में मदद कर सकती है। ऊबड़-खाबड़ रास्तों, कीचड़, बर्फ या कठोर सतह पर नाल घोड़े को बेहतर पकड़ भी दे सकती है। हालांकि, हर घोड़े को नाल की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ घोड़ों को स्वस्थ खुरों के साथ बिना नाल के भी रखा जाता है। इसका फैसला घोड़े की जरूरत और उसकी शारीरिक स्थिति के आधार पर किया जाता है।

नाल लगाने वाला कौन होता है

घोड़े के खुरों की देखभाल और नाल लगाने वाले विशेषज्ञ को फेरियर (Farrier) कहा जाता है। वह खुर को सही आकार देने, उसकी सफाई करने और घोड़े के लिए उपयुक्त नाल फिट करने का काम करता है। यह काम काफी सावधानी से किया जाता है, क्योंकि नाल गलत तरीके से लगाने पर घोड़े के खुर को नुकसान पहुंच सकता है।

क्या सच में गर्म लोहे से खुर जलाया जाता है

हॉट शूइंग की प्रक्रिया में नाल को गर्म किया जाता है और फिर उसे थोड़ी देर के लिए खुर के बाहरी हिस्से पर लगाया जाता है। इस प्रक्रिया को हॉट फिटिंग कहा जाता है। लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि घोड़े के खुर का बाहरी कठोर हिस्सा संवेदनशील त्वचा जैसा नहीं होता। इसकी संरचना काफी हद तक मानव नाखून जैसी केराटिन से बनी होती है। इसलिए सही तरीके से और थोड़े समय के लिए गर्म नाल का संपर्क कराने से आमतौर पर घोड़े को वैसा दर्द नहीं होता जैसा जीवित त्वचा को जलने पर होता है। गर्म नाल खुर पर हल्का निशान छोड़ती है। इससे फेरियर को यह समझने में मदद मिलती है कि नाल खुर के आकार के अनुसार सही तरीके से फिट हो रही है या नहीं।

कैसे तैयार की जाती है घोड़े के लिए नाल

जरूरत के अनुसार लोहे की नाल को भट्टी में गर्म किया जाता है। इसके बाद फेरियर हथौड़े की मदद से उसके आकार में आवश्यक बदलाव करता है, ताकि वह घोड़े के खुर के अनुरूप फिट हो सके। नाल को सही आकार देने के बाद उसे खुर पर जांचा जाता है। यह प्रक्रिया नाल और खुर के बीच उचित फिट सुनिश्चित करने में मदद करती है।

फिर कीलों से लगाई जाती है नाल

नाल का आकार सही होने के बाद उसे विशेष घोड़े की नाल वाली कीलों की मदद से खुर पर लगाया जाता है। कीलें खुर के बाहरी हिस्से से होकर सुरक्षित तरीके से लगाई जाती हैं। फेरियर इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि कील संवेदनशील अंदरूनी हिस्से तक न पहुंचे। सही तरीके से लगाई गई नाल घोड़े के खुर को अतिरिक्त सुरक्षा और जमीन पर बेहतर पकड़ देने में मदद कर सकती है।

कोल्ड शूइंग क्या होती है

नाल लगाने का दूसरा तरीका कोल्ड शूइंग है। इसमें नाल को लाल गर्म नहीं किया जाता। तैयार नाल को खुर के आकार के अनुसार आवश्यक बदलाव करके सीधे फिट किया जाता है। इसके बाद उसे उचित स्थान पर कीलों की मदद से सुरक्षित कर दिया जाता है। यह तरीका भी काफी प्रचलित है और कई परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

हर घोड़े के लिए नाल जरूरी नहीं

घोड़े को नाल पहनानी है या नहीं, यह केवल परंपरा के आधार पर तय नहीं किया जाता। घोड़े के खुरों की स्थिति, उसका काम, चलने वाली सतह और स्वास्थ्य जैसी कई चीजों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए गर्म नाल को खुर पर लगाना वास्तव में खुर को जलाने के लिए नहीं, बल्कि हॉट फिटिंग के दौरान नाल का सही आकार और फिट जांचने की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, यह काम केवल प्रशिक्षित फेरियर द्वारा ही सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

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