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भारत ने मार गिराया था अपना सैटेलाइट, अमेरिका भी रह गया था हैरान; पूर्व खुफिया अधिकारी का खुलासा

by | Oct 4, 2026 | News Big

Mission Shakti: भारत के मिशन शक्ति परीक्षण ने मार्च 2019 में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस मिशन के तहत भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के जरिए अपने ही एक उपग्रह को नष्ट किया था। अब पूर्व अमेरिकी वायु सेना खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने खुलासा किया है कि इस परीक्षण की खबर से अमेरिकी खुफिया समुदाय भी चौंक गया था।

मिशन शक्ति से क्यों हैरान हुआ अमेरिका

डेविड ग्रुश ने ‘जो रोजन पॉडकास्ट’ में मिशन शक्ति को याद करते हुए बताया कि उस समय वह नेशनल रिकॉनिसेंस ऑफिस (NRO) में तैनात थे। उनके मुताबिक, अमेरिका को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि भारत अपना उपग्रह मार गिराने की क्षमता का इस तरह प्रदर्शन करेगा। हालांकि, अमेरिकी चिंता परीक्षण की सफलता को लेकर नहीं थी, बल्कि इससे पैदा हुए अंतरिक्ष मलबे को लेकर थी। यह मलबा कक्षा में मौजूद अमेरिकी जासूसी और निगरानी उपग्रहों के लिए खतरा बन सकता था।

270 से अधिक मलबे के टुकड़े हुए ट्रैक

मिशन शक्ति के दौरान भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद अपने माइक्रोसैट-आर उपग्रह को काइनेटिक इंटरसेप्ट के जरिए निशाना बनाया था। अमेरिकी ट्रैकर्स ने इसके बाद कम से कम 270 मलबे के टुकड़ों को ट्रैक किया। नासा ने भी बाद में पुष्टि की थी कि मलबे के कुछ टुकड़ों के कारण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए थोड़े समय के लिए जोखिम बढ़ गया था। अंतरिक्ष में मौजूद मलबा तेज गति से टकराने पर दूसरे उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय तक कक्षा में बना रह सकता है।

कम ऊंचाई पर किया गया था परीक्षण

भारत ने मिशन शक्ति का परीक्षण कम ऊंचाई पर किया था, ताकि इससे पैदा हुआ मलबा जल्द ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल जाए और लंबे समय तक अंतरिक्ष में खतरा न बना रहे। इसके बावजूद मलबे के टुकड़ों की संख्या ने अंतरिक्ष सुरक्षा और मलबा प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। इस परीक्षण के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद सार्वजनिक रूप से एंटी-सैटेलाइट क्षमता का प्रदर्शन करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया था।

अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर बढ़ी चर्चा

भारत ने मिशन शक्ति को अपनी अंतरिक्ष रक्षा क्षमता का प्रदर्शन बताया था और स्पष्ट किया था कि यह किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं था। वहीं, डेविड ग्रुश के बयान से यह सामने आया कि ऐसे परीक्षणों से पैदा होने वाला मलबा दूसरे देशों के उपग्रहों और अंतरिक्ष में मौजूद लोगों के लिए जोखिम बन सकता है।

मिशन शक्ति ने भारत की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करने के साथ ही अंतरिक्ष में सुरक्षा और मलबा प्रबंधन की अहमियत को भी रेखांकित किया।

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