North Korea Missile Test: नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने शनिवार को मध्यम दूरी की मिसाइल के परीक्षण की निगरानी की। सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, मिसाइल ने करीब 1000 किलोमीटर की दूरी तय कर पूर्वी समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को भेदा। इस परीक्षण के बाद जापान और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। नॉर्थ कोरिया ने इसे अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है।
1000 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर किया निशाना
KCNA की रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने पूर्वी हिस्से से मिसाइल लॉन्च की, जिसने करीब 1000 किलोमीटर की उड़ान भरी। किम जोंग-उन ने इसे प्रतिरोध क्षमता का अभ्यास बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली का संचालन करने वाले सैनिकों को प्रशिक्षित करना और सैन्य क्षमता का आकलन करना है।
वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने मिसाइल की उड़ान 700 किलोमीटर से अधिक आंकी। उसके मुताबिक, मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरी। किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने दावा किया कि मिसाइल ने विशेष वेव-लाइक ट्रैजेक्टरी अपनाई, जिससे दक्षिण कोरिया और जापान उसे सही तरीके से ट्रैक नहीं कर सके।
हाइपरसोनिक और AI तकनीक का दावा
नॉर्थ कोरिया ने इस मिसाइल को हाइपरसोनिक क्षमता वाली रणनीतिक प्रणाली का हिस्सा बताया है। कुछ रिपोर्टों में मिसाइल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल और उड़ान के दौरान दिशा में सुधार करने की तकनीक का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन तकनीकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
किम जोंग-उन ने कहा कि देश को अपने रणनीतिक हथियारों की विश्वसनीयता और मारक क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी रखने चाहिए। यह परीक्षण 2026 में नॉर्थ कोरिया के 10 से अधिक मिसाइल परीक्षणों की श्रृंखला का हिस्सा है।
DMZ में तनाव के बीच बढ़ी हलचल
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में पहले से तनाव बना हुआ है। पिछले महीने डिमिलिटराइज्ड जोन (DMZ) में बारूदी सुरंग विस्फोट से दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे। दक्षिण कोरिया और संयुक्त राष्ट्र कमांड ने नॉर्थ कोरिया पर सीमा के पास बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाया था, लेकिन प्योंगयांग ने इससे इनकार किया।
लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षणों से जापान और दक्षिण कोरिया की चिंताएं बढ़ रही हैं। किम जोंग-उन ने परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। ऐसे में क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।
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