US Supreme Court tariffs: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारस्परिक शुल्कों को रद्द करने के आदेश के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत सरकार इस फैसले का अध्ययन करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया केवल वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय द्वारा ही दी जाएगी, न कि उनके व्यक्तिगत बयान के आधार पर।
प्रल्हाद जोशी ने मीडिया से कहा, “मैंने पढ़ा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ फैसला सुनाया है। भारत सरकार इस फैसले का अध्ययन करेगी और जो भी प्रतिक्रिया देनी होगी, वह वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय द्वारा दी जाएगी। मेरा व्यक्तिगत बयान इस पर नहीं होगा।”
यह बयान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के तुरंत बाद आया, जिसमें न्यायालय ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किया। अदालत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। इस फैसले के बाद भारत सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
फैसले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा और भारत को टैरिफ का भुगतान जारी रखना होगा। ट्रंप ने कहा, “कुछ भी नहीं बदलेगा। भारत को शुल्क देना होगा और हमें नहीं देना होगा। प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक महान व्यक्ति हैं। अमेरिका के मामले में उन्होंने हमारे विरोधियों से कहीं ज्यादा समझदारी दिखाई।”
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। ट्रंप के अनुसार, यह निर्णय वैश्विक युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए लिया गया, जिसमें उनका कहना था कि हर महीने 25,000 लोग मारे जा रहे हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध उत्कृष्ट हैं और दोनों देश इस मामले में सहयोग कर रहे हैं।
इस घटना ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया। अमेरिकी टैरिफ के फैसले से भारत को विभिन्न व्यापारिक प्रतिबद्धताओं और शुल्क संरचना में संभावित बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि वर्तमान व्यापार समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत सरकार अब इस फैसले का गहन अध्ययन कर रही है और आगामी दिनों में आवश्यक रणनीति तय करेगी। इसके तहत वाणिज्य और विदेश मंत्रालय मिलकर टैरिफ रियायतों, संभावित व्यापार समझौते और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेंगे ताकि भारत के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
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