Indian Stock Market Crash October 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और महंगाई की आशंका ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। शुक्रवार को सेंसेक्स लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। इन चार सत्रों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब ₹20.79 लाख करोड़ घट गया।
चार दिनों में सेंसेक्स 1,600 अंक से ज्यादा टूटा
शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17% गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। छुट्टियों के कारण छोटे रहे कारोबारी सप्ताह में सूचकांक 1,605.44 अंक यानी 2.15% फिसला। 16 अक्टूबर को BSE की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण ₹4,72,62,167.42 करोड़ था, जो चार सत्रों में घटकर ₹4,51,83,393.14 करोड़ रह गया।
शेयर बाजार में गिरावट की 5 प्रमुख वजहें
- पश्चिम एशिया में तनाव: अमेरिका-ईरान संघर्ष और संभावित अमेरिकी-इजरायली हमलों से अनिश्चितता बढ़ी।
- कच्चे तेल की तेजी: ब्रेंट क्रूड 116.73 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से भारत के आयात बिल पर दबाव की आशंका है।
- महंगाई का खतरा: महंगे तेल से कंपनियों की लागत और उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं।
- अमेरिकी बाजारों में कमजोरी: वॉल स्ट्रीट की गिरावट ने भारतीय निवेशकों को सतर्क किया।
- कमजोर रुपया और बॉन्ड यील्ड: रुपये में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ते रिटर्न से बिकवाली का दबाव बढ़ा।
पांच महीने के उच्च स्तर पर कच्चा तेल
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 3% चढ़कर 116.73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो पांच महीने का उच्च स्तर है। अमेरिका-ईरान की कूटनीतिक बातचीत में रुकावट, ईरानी परमाणु और सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों तथा यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च-वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, महंगा तेल और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय बाजार तथा कंपनियों की लागत पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
किन शेयरों में गिरावट और कहां रही तेजी?
शुक्रवार को टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयर 3% से ज्यादा टूटे। ट्रेंट, टेक महिंद्रा, BEL, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, NTPC, SBI और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी गिरावट में रहे। वहीं, इटरनल, L&T, रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस और ICICI बैंक में बढ़त दर्ज हुई।
कमजोर रुपये और अमेरिकी बाजारों का असर
इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज के अनुसार, अमेरिकी शेयर बाजारों की कमजोरी, महंगा कच्चा तेल और रुपये में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। उन्होंने बताया कि अधिकांश एशियाई बाजारों में सुधार के बावजूद भारत में तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से महंगाई की आशंका बनी रही।
अगले सप्ताह जियो IPO और फेड की बैठक पर नजर
जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,213 करोड़ का IPO 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ है। इसके शेयर 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर सूचीबद्ध होने वाले हैं। निवेशक 27-28 अक्टूबर की अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैठक, अमेरिका के शुरुआती बेरोजगारी दावों, GDP वृद्धि के आंकड़ों और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर संबंधी फैसले पर भी नजर रखेंगे। पेटीएम, टाटा कंज्यूमर, L&T, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, ट्रेंट, सन फार्मा और BEL समेत कई कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी आने हैं।
अगले सप्ताह बाजार को किन 7 संकेतों से मिल सकती है राहत?
- बेहतर तिमाही नतीजे: कंपनियों की मजबूत कमाई शेयरों को सहारा दे सकती है।
- फेडरल रिजर्व का फैसला: ब्याज दरों पर राहत भरे संकेत बाजार का भरोसा बढ़ा सकते हैं।
- जियो की लिस्टिंग: मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद इसकी लिस्टिंग निवेशकों के रुझान का संकेत देगी।
- विदेशी निवेश: विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटने या खरीदारी लौटने से बाजार संभल सकता है।
- रुपये और बॉन्ड यील्ड में सुधार: मजबूत रुपया और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में टिकाऊ नरमी राहत दे सकती है।
- कच्चे तेल में गिरावट: तेल सस्ता होने और पश्चिम एशिया में तनाव घटने से महंगाई तथा आयात बिल की चिंता कम होगी।
- वैश्विक आर्थिक आंकड़े: अमेरिकी रोजगार, GDP और जापान की मौद्रिक नीति के सकारात्मक संकेत निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल बाजार की अगली दिशा कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी।
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