ईरान-इजराइल जंग का असर
Russian Oil India: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अमेरिका को भी अपनी कूटनीतिक रणनीति में अस्थायी बदलाव करना पड़ा है। इसी कड़ी में अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत देते हुए अगले 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदने की विशेष अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल, 28 फरवरी से ईरान और इजराइल के बीच शुरू हुए सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर दिया है। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी तेल आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है, इसलिए इस फैसले का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में देखने को मिला। तेल आपूर्ति में अचानक आई इस अनिश्चितता के कारण कई देशों को ऊर्जा संकट की आशंका सताने लगी है। भारत भी उन देशों में शामिल है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा व्यापार पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की आर्थिक ताकत को सीमित करना था। इसी कारण भारत पर भी रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन पश्चिम एशिया में अचानक बिगड़े हालात ने अमेरिका को व्यावहारिक रुख अपनाने के लिए मजबूर कर दिया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक विशेष लाइसेंस जारी कर भारत को 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदने की छूट दे दी है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा न आए।
मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ता सैन्य तनाव है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक बेहद अहम रास्ता है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में किसी तरह की रुकावट आती है तो वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि अमेरिका फिलहाल भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों को राहत देने की रणनीति अपना रहा है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई अचानक रुक जाती, तो देश में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता था। हालांकि भारत के पास कुछ हफ्तों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संकट गहरा सकता था। ऐसे में अमेरिका की यह छूट भारत के लिए फिलहाल बड़ी राहत मानी जा रही है।
पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी दबाव के चलते भारत ने रूस से तेल आयात में थोड़ी कमी की थी। लेकिन अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता बन गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में रूस से कच्चे तेल की खरीदारी फिर से बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात जब तक स्थिर नहीं होते, तब तक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट को टालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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