पश्चिम बंगाल

जनता उन्नयन पार्टी का ऐलान, बंगाल की राजनीति में बदली सियासी हवा, अल्पसंख्यक वोट बैंक पर हुमायूं कबीर का बड़ा खेल!

Humayun Kabir JUP: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हर रोज नए उठा-पटक चल रहे है। TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अब अपने दम पर राजनीति में सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी (Janata Unnayan Party) का ऐलान कर राज्य की सियासी हलचल बढ़ा दी है। हुमायूं का लक्ष्य कम से कम 90 सीटों पर जीत हासिल करना है, ताकि विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी नई सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सके।

हुमायूं कबीर का राजनीतिक मकसद

मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका काम अल्पसंख्यक वोटर्स को एकजुट करना होगा। उनका कहना है कि अगर चुनाव में यह योजना सफल नहीं होती, तो मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने का उनका सपना अधूरा रह जाएगा। बंगाल की राजनीति में पहले से ही दो प्रमुख मुस्लिम नेता सक्रिय रहे हैं। एक नेता कांग्रेस के साथ है और दूसरा टीएमसी के साथ। ऐसे में हुमायूं कबीर तीसरे नए राजनीतिक नेतृत्व के रूप में अपने स्वतंत्र राजनीतिक पाँव जमा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे बीजेपी के साथ किसी भी गठबंधन में नहीं जाएंगे।

बंगाल में अन्य मुस्लिम नेताओं का राजनीतिक प्रभाव

कांग्रेस में शामिल खोबायेब अमीन पश्चिम बंगाल में प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें पार्टी महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी बनाया गया। अमीन का परिवार बंगाल, ओडिशा और त्रिपुरा में शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में जाना जाता है। टीएमसी ने भी पीछे नहीं हटते हुए फुरफुरा शरीफ के कासिम सिद्दीकी को पार्टी महासचिव नियुक्त किया। उनका यह कदम इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के बढ़ते प्रभाव को रोकने और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए रणनीतिक माना जा रहा है।

कासिम सिद्दीकी का परिवार दक्षिण 24 परगना में बेहद प्रभावशाली है। ISF ने 2021 में इस क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन किया था और पंचायत चुनावों में करीब 400 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की। इस कारण टीएमसी ने कासिम को पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल किए बिना ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी।

बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण की तैयारी

भले ही विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीनों दूर हैं, लेकिन बंगाल की राजनीतिक फिजा पहले ही गर्म हो गई है। हुमायूं कबीर की पार्टी और अन्य प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं की गतिविधियों से राज्य में चुनावी माहौल नया रंग ले रहा है। बीजेपी भी राज्य में सांप्रदायिक घटनाओं और हिंसा के मामलों के जरिए माहौल बनाने में सक्रिय दिख रही है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि हुमायूं कबीर का नया राजनीतिक मंच किसके लिए चुनौती और किसके लिए अवसर साबित होता है। क्या वह कांग्रेस या टीएमसी के लिए मुसीबत बनेंगे, या फिर खुद की पार्टी के दम पर सियासी शक्ति हासिल करेंगे, यह अगले विधानसभा चुनाव में साफ होगा।

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Shagun Chaurasia

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