Kiren Rijiju Statement: किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा फैलाने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि भारत-विरोधी समूहों और कुछ राजनेताओं ने युवाओं को भड़काने की कोशिश की। रिजिजू ने अपने पोस्ट में कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव है, न कि किसी बाहरी ताकत का हस्तक्षेप।
वीडियो साझा कर प्रदर्शनकारियों पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया। इसमें नेहा बोरा की ओर से बांग्लादेश के युवाओं को धन्यवाद देने वाले क्लिप, प्रशांत भूषण के 'रिजीम चेंज' संबंधी बयान और जुलाई-अगस्त के प्रदर्शनों के दृश्य शामिल बताए गए हैं। रिजिजू ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए भारत में युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा फैलाने की कथित योजना का आरोप लगाया। हालांकि, इन घटनाओं को किसी एक साजिश से जोड़ने वाले दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
15 अक्टूबर को भी किया था पोस्ट
इससे पहले 15 अक्टूबर को किरेन रिजिजू ने एक और पोस्ट साझा किया था। इसमें उन्होंने देश में चल रहे वैचारिक टकराव का जिक्र करते हुए एक पक्ष को 'दिमागी नक्सली' और दूसरे को देशभक्त भारतीय बताया था। उन्होंने कहा था कि एक ओर संविधान में विश्वास रखने वाले लोग हैं, जबकि दूसरी ओर अराजकता फैलाने वाली ताकतें हैं। उनके इस बयान में भी देश-विरोधी गतिविधियों और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई थी।
17 अक्टूबर को 'रिजीम चेंज' के मुद्दे पर घेरा
17 अक्टूबर को रिजिजू ने एक अन्य पोस्ट में 'रिजीम चेंज' की बात करने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि भारत बांग्लादेश नहीं है और भारतीय युवा देश को बनाने में योगदान देंगे, न कि उसे नुकसान पहुंचाएंगे। उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय युवा खेल, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन पर क्या है रिजिजू का तर्क?
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए ही पूरी होनी चाहिए। उन्होंने 'रिजीम चेंज' की चर्चा को इसी संदर्भ में उठाते हुए बाहरी हस्तक्षेप पर सवाल खड़े किए। फिलहाल, भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा फैलाने की कथित योजना को लेकर रिजिजू के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मामले में उनके बयानों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
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