Maharashtra: महाराष्ट्र FDA ने दो साल तक के बच्चों से जुड़े इन्फेंट फॉर्मूला, इन्फेंट मिल्क फूड, फॉलो-अप फॉर्मूला, कॉम्प्लिमेंटरी फूड, स्पेशल मेडिकल पर्पज फूड और फीडिंग बॉटल्स के लिए कंप्लायंस ऑर्डर जारी किया है। नियम पैकेजिंग, लेबलिंग, विज्ञापन, प्रमोशन और बिक्री के साथ पूरी सप्लाई चेन पर लागू होंगे। निर्माता, ब्रांड ओनर, इम्पोर्टर, पैकर, डिस्ट्रीब्यूटर, मेडिकल स्टोर, अस्पताल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जांच के दायरे में हैं।
किसी उत्पाद को मां के दूध के बराबर या बेहतर बताने, फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन और कैशबैक देने पर रोक है। टीवी, प्रिंट, वेबसाइट, सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर के जरिए भी प्रतिबंधित प्रचार नहीं किया जा सकता। डॉक्टरों या हेल्थ वर्कर्स को गिफ्ट, आर्थिक लाभ, स्पॉन्सरशिप, हॉस्पिटैलिटी या स्पीकर फीस देकर प्रचार कराना भी प्रतिबंधित है।
पैक पर उम्र, इस्तेमाल, सामग्री, पोषण और चेतावनियां स्पष्ट होनी चाहिए। “कम्प्लीट”, “हेल्थ फूड”, “एनर्जी फूड” और “ह्यूमनाइज्ड” जैसे भ्रामक शब्दों पर भी रोक है। शिशु या महिला की तस्वीरें इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं। कॉम्प्लिमेंटरी फूड छह महीने के बाद ही दिया जाना चाहिए। एडेड कलर, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए, जबकि सुक्रोज-फ्रुक्टोज कुल कार्बोहाइड्रेट के 20% तक सीमित हैं।
नियमों का आधार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006, 2020 के शिशु पोषण नियम और IMS Act है। उल्लंघन पर FDA जांच, सैंपलिंग, तलाशी, जब्ती, अभियोजन, जुर्माना और लाइसेंस कार्रवाई कर सकता है। अस्पतालों और पीडियाट्रिशियनों को संदिग्ध एडवर्स इवेंट्स की जानकारी देनी होगी। FDA ने अस्पतालों, IAP और IMA समेत संगठनों के साथ बैठकें करने की बात कही है।
राज्य में छह महीने तक के बच्चों में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग करीब 55.8% है। शहरों में यह 52.8% और गांवों में 75.2% बताई गई है। करीब 96% प्रसव संस्थागत होते हैं, लेकिन पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने के लिए बेहतर काउंसलिंग की जरूरत बताई गई है। छह महीने बाद स्तनपान के साथ उचित पूरक पोषण की सलाह है। शिशु आहार की बिक्री प्रतिबंधित नहीं, उसकी मार्केटिंग नियंत्रित है।
शिवसेना UBT सांसद संजय राउत ने FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि होटल, रेस्टोरेंट और क्विक-कॉमर्स कारोबारियों को लाइसेंस निलंबित करने की धमकी देकर पैसे मांगे जा रहे हैं। उनके अनुसार क्लोजिंग नोटिस वापस कराने की कथित रकम 10-12 हजार से बढ़कर 75 हजार से 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की।
मुंढे ने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कार्रवाई नहीं हो सकती और ठोस सबूत जरूरी हैं। शिकायतकर्ता को अधिकारी, व्यक्ति और मांगी गई रकम का उद्देश्य बताना होगा। सबूत उन्हें, ACB, विभागीय सचिव या सक्षम एजेंसी को दिए जा सकते हैं। उन्होंने ACB के DG से बात करने और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कही। 6 अगस्त तक करीब 600 सस्पेंशन हुए थे, जिनमें 100-125 अपीलों पर निर्णय लिया गया। मुंढे ने कहा कि अपील और अदालत का रास्ता खुला है। FDA पोर्टल पर शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था है, ताकि उसे दबाव या ब्लैकमेल से बचाया जा सके।
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